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सरकार को प्रचंड की बातों पर अफ़सोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार ने बीबीसी को दिए गए माओवादी विद्रोही नेता प्रचंड के साक्षात्कार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. पहली बार किसी टेलीविज़न को दिए गए इंटरव्यू में प्रचंड ने कहा था कि वे नेपाल नरेश के लिए दो ही रास्ते देखतें है - एक ये कि नेपाल नरेश निर्वासन पर चले जाएँ या उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जाए. प्रचंड के इस साक्षात्कार पर प्रतिक्रिया देते हुए नेपाल के सूचना राज्य मंत्री शिरीष शमशेर राना ने कहा कि बाधाओं के बावजूद अधिकांश जनता राजा ज्ञानेंद्र जहाँ भी जाएँ उनको देखने के लिए उमड़ पड़ती है. नेपाली मंत्री ने ये भी कहा कि पिछले दिनों हुए स्थानीय चुनावों में नगरपालिकाओं के दायरे में आनेवाले 21 प्रतिशत लोगों ने चुनाव में मत डाले. मंत्री ने कहा कि इतने लोगों ने तब वोट दिए जब माओवादियों और राजनीतिक दलों के बीच तालमेल था और उन्होंने चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की हुई थी. ये पूछे जाने पर कि क्या माओवादियों के साथ सीधी बातचीत का समय आ गया है, मंत्री ने कहा कि सैद्धांतिक तौर पर ये अच्छा लग सकता है लेकिन प्रचंड के इंटरव्यू से ऐसा संभव नहीं लगता. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि माओवादी बातचीत में दूसरे पक्ष के हक़ में कुछ भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि प्रचंड की बातों से ये बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि माओवादी अपनी उन पुरानी माँगों से पीछे हटने को ज़रा भी तैयार नहीं हैं जिन्हें लेकर उन्होंने 10 साल पहले विद्रोह शुरू किया था. |
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