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दया नायक की गिरफ़्तारी पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई पुलिस के एनकाउंटर विशेषज्ञ दया नायक की अग्रिम ज़मानत की अर्जी विशेष अदालत ने नामंज़ूर कर दी है. लेकिन मुंबई हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी है. मुंबई की एक विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम ज़मानत की अर्जी नामंज़ूर कर दी. लेकिन उसके तुरंत बाद वे मुंबई हाईकोर्ट चल गए और अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई तक उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी है. ग़ौरतलब है कि दया नायक पर आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है और उन्हें पुलिस से निलंबित कर दिया गया है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो उन्हें और उनकी पत्नी को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ़्तार करना चाहता है. दया नायक इन आरोपों से इनकार करते हैं. नायक से खलनायक मुंबई पुलिस की अपराध गुप्तचर शाखा के इंस्पेक्टर और 'एनकाउंटर माहिर' कहे जाने वाले दया नायक से किसी ज़माने में अपराधी ख़ौफ़ खाते थे. दया नायक का दावा रहा है कि उन्होंने 83 अपराधियों को मुठभेड़ में मारा है. दया नायक की शुरुआत बहुत साधारण सी थी. वो 1979 में कर्नाटक के एक गाँव से मुंबई में अपना भाग्य आजमाने पहुंचे थे. वो 1995 में मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बने और जल्द ही वो पुलिस के उस दल में शामिल हो गए जिसे ऊपर मुंबई के अपराधियों का सफ़ाया करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी. उनके इंटरव्यू लगातार मीडिया में आते रहे और उनके जीवन पर आधारित कई फ़िल्में बनी हैं जिनमें से 'कगार' और 'अब तक 56' शामिल हैं. फ़िल्म सितारों से उनकी दोस्ती थी. नाना पाटेकर ने 'अब तक 56' के निर्माण के दौरान उनके साथ कई दिन बिताए थे. अमिताभ बच्चन को वे कर्नाटक के अपने गाँव के प्राथमिक विद्यालय का उदघाटन कराने ले गए थे. लेकिन भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों के कारण अब उन्हें पुलिस से निलंबित कर दिया गया है. |
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