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गुरुवार, 26 जनवरी, 2006 को 06:40 GMT तक के समाचार
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दया नायकःनायक बना खलनायक

मुंबई पुलिस
दया नायक पर लगे आरापों से मुंबई पुलिस पर सवाल खड़े हो गए हैं
मुंबई पुलिस की अपराध गुप्तचर शाखा यानी सीबीसीआईडी के इंस्पैक्टर और 'एनकाउंटर माहिर' कहे जाने वाले दया नायक से किसी ज़माने में अपराधी ख़ौफ़ खाते थे.

दया नायक का दावा रहा है कि उन्होंने 83 अपराधियों को मुठभेड़ में मारा है. उनकी तस्वीरें सभी अख़बारों में नियमित रूप से छपती थीं और यहाँ तक कि उनके जीवन पर फ़िल्में भी बनीं हैं.

पहले ऐसी ख़बरें आईं थीं कि उन्होंने आय अधिक संपत्ति जमा कर ली है और पिछले शनिवार को उनके घर पर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने छापा मारा और उन्हें पुलिस से निलंबित कर दिया गया है.

दया नायक की शुरुआत बहुत साधारण सी थी. वो 1979 में कर्नाटक के एक गाँव से मुंबई में अपना भाग्य आजमाने पहुंचे.

उन्होंने रेस्तराँ में मेज़-कुर्सियाँ साफ़ की और बढ़ई का काम किया और शाम के एक स्कूल में जाकर अपनी शिक्षा हासिल की.

दया नायक 1995 में मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बने और उसके बाद वो अपराध शाखा में आ गए.

जल्द ही वो पुलिस के उस दल में शामिल हो गए जिसे ऊपर मुंबई के अपराधियों का सफ़ाया करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी.

बॉलीवुड से रिश्ते

उनके इंटरव्यू लगातार मीडिया में आते रहे और यह भी कहा गया कि उनके जीवन पर आधारित कई फ़िल्में बनी हैं जिनमें से 'अब तक 56' को भी बताया गया है.

 दया नायक की कहानी में ग्लैमर, रोमांच और एक ऐसे शख़्स के सभी तत्व मौजूद थे जो विपरीत परिस्थितियों से लड़ता है और आख़िरकार सफल होता है
इंदू मीरानी, फ़िल्म समीक्षक

फ़िल्म समीक्षक इंदू मीरानी का कहना है कि बॉलीवुड हमेशा एक स्टोरी की तलाश में रहता है और दया नायक ने उसे तैयार स्क्रिप्ट प्रदान कर दी.

उनका कहना था, ''दया नायक की कहानी में ग्लैमर, रोमांच और एक ऐसे शख़्स के सभी तत्व मौजूद थे जो विपरीत परिस्थितियों से लड़ता है और आख़िरकार सफल होता है.''

फ़िल्म सितारों से उनकी दोस्ती थी. नाना पाटेकर ने 'अब तक 56' के निर्माण के दौरान उनके साथ कई दिन बिताए थे.

वो अमिताभ बच्चन को कर्नाटक के अपने गाँव एक प्राथमिक विद्यालय का उदघाटन करने ले गए थे.

लेकिन जल्द ही उनका आभा मंडल टूट गया और स्थानीय पत्रकार केतन तिरोड़कर अदालत में चले गए और उन्होंने आरोप लगाया कि दया नायक की अपराधियों से साठगाँठ है.

तिरोड़कर ने बीबीसी को बताया कि वो इस बात से हतप्रभ थे कि दया नायक फ़ैसला लेते थे कि कौन सा मामला किसके ख़िलाफ़ चलेगा.

पहले तो उनका तबादला कांदिवली के एक छोटे से पुलिस थाने में कर दिया गया. लेकिन पिछले सप्ताह भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने उनके घर पर छापा मारा और सोमवार को उन्हें निलंबित कर दिया गया.

पुलिस के क़ानून-व्यवस्था के संयुक्त निदेशक अरूप पटनायक कहते हैं कि कोई भी अधिकारी क़ानून से ऊपर नहीं है और जो ख़राब लोग हैं वो बाहर हो जाएंगे.

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