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मृत आदिवासियों के हाथ काटने पर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा में पिछले दिनों पुलिस की गोली का शिकार हुए 12 में से पाँच आदिवासियों के हाथ काटे जाने की बात सामने आने से इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है. राज्य के विपक्षी दलों के अलावा उड़ीसा के पड़ोसी राज्यों के आदिवासी नेताओं तथा मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले पर प्रशासन को आड़े हाथ लेना शुरू कर दिय है. उड़ीसा के पुलिस महानिदेशक ने स्वीकार किया है कि नियमों के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता और इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय जाँच कर रहा है. पुलिस महानिदेशक शुचित दास ने बीबीसी से कहा,"नियमों के हिसाब से हाथ काटा नहीं जाना चाहिए था, पहचान के लिए उंगुलियों के निशान लिए जाते हैं, तो ये कैसे हुआ, इस बारे में जाँच हो रही है और रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी". लेकिन एक दिन पहले जाजपुर के पुलिस अधीक्षक ने कहा था कि चिकित्सकों ने जो भी किया वह नियमों के अनुसार किया. पुलिस अधिकारी का इसी दिन तबादला कर दिया गया. एसपी विनयतोष मिश्रा ने पत्रकारों से कहा,"नियम ये कहते हैं कि अगर शव की पहचान संभव नहीं है तो उंगलियों के निशान के लिए उसके हाथ काटे जा सकते हैं". उल्लेखनीय है कि सोमवार को उड़ीसा के जाजपुर ज़िले स्थित कलिंगनगर में एक स्टील प्लांट के निर्माण का विरोध करने गए आदिवासियों पर पुलिस के गोली चलाने से 12 आदिवासी मारे गए थे. आरोप और कार्रवाई जाजपुर ज़िले के आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि संघर्ष में एक पुलिसकर्मी की मौत का बदला लेने के लिए पुलिस ने ऐसा किया. वहीं मानवाधिकार संगठनों ने ऐसी भी आशंका जताई कि शायद ज़्यादतियों के सुबूत मिटाने के इरादे से पाँच आदिवासियों के हाथ काट लिए गए. उड़ीसा सरकार ने शवों के हाथ काटे जाने की बात सामने आने के बाद पोस्टमॉर्टम करनेवाले तीन डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है. जाजपुर ज़िले के ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक का भी तबादला कर दिया गया है. सरकार ने मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजन को मुआवज़े की राशि को अब एक लाख रूपए से बढ़ाकर पाँच लाख रूपए कर दिया है. मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के एक परिजन को सरकारी नौकरी देने और घायलों को 50,000 रूपए देने की भी घोषणा की गई है. घेरने की तैयारी इस बीच आदिवासियों पर गोलीबारी के मुद्दे पर उड़ीसा में नवीन पटनायक की सरकार को जहाँ विपक्षी दल और मानवाधिकार कार्यकर्ता घेरने की कोशिश कर रहे हैं वहीं स्वयं उनके गठबंधन के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. भुवनेश्वर से पत्रकार संदीप साहू के अनुसार राज्य में बीजू जनता दल-बारतीय जनता पार्टी सरकार मे बीजेपी के 16 विधायक आदिवासी और अनुसूचित जाति से आते हैं और उन्होंने अपनी पार्टी से कहा है कि वह सरकार से हाथ खींच ले. वहीं उड़ीसा के पड़ोसी राज्यों,छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा और झारखंड के आदिवासी नेता शिबू सोरेन ने इस मामले को आगे ले जाने की बात की है. उन्होंने उड़ीसा के आदिवासियों के समर्थन करने के लिए कहा है कि शनिवार को उड़ीसा में प्रस्तावित बंद का वे अपने राज्यों में भी समर्थन करेंगे. उधर दिल्ली में मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फ़ॉर डेमोक्रेटिक राइट्स के प्रवक्ता हरीश धवन ने इस बारे में बीबीसी से कहा,"ये पहली बार पुलिस ने ऐसी वहशियाना हरकत की है, जिनीवा कन्वेंशन के तहत किसी भी शव की ऐसी तौहीन नहीं की जा सकती". उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में आपराधिक मामला दायर किया जाना चाहिए. संस्था इसके विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन भी कर रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'दलित महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया गया'24 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस विधानसभा हंगामे में मुख्यमंत्री घायल02 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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