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प्रधानमंत्री, राज्यपाल के इस्तीफ़े की माँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार विधानसभा भंग करने के राज्यपाल बूटा सिंह के फ़ैसले पर भाजपा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राज्यपाल बूटा सिंह के इस्तीफ़े की माँग की है. दूसरी ओर कांग्रेस ने सु्प्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कहा है कि इससे स्पष्ट है कि मंत्रिमंडल का इसमें कोई दोष नहीं था. बिहार विधानसभा भंग किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्यपाल बूटा सिंह ने असंवैधानिक निर्णय लेते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल को गुमराह किया. भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कांग्रेस का यह कहना कि मंत्रिमंडल को दोषमुक्त पाया गया है, यह सरसरा गलत है. अदालत के फ़ैसले के दूरगामी परिणाम होंगे. उन्होंने मांग की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह दोनों दोषी हैं और दोनों को इस्तीफ़ा देना चाहिए. इस मामले को लेकर एनडीए नेता जल्द ही राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से मिलेंगे और उन्हें एक ज्ञापन देंगे. भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा,'' हम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हैं. इससे हमारे रुख़ की पुष्टि होती है.'' सरकार ने संविधान की शपथ ली हुई है और यदि वह कुछ असंवैधानिक होता है तो सरकार को जाना चाहिए. मल्होत्रा का कहना था कि इस बात से साफ़ हो गया है कि मंत्रिमंडल को गुमराह किया जा सकता है. इससे यह साबित होता है कि सरकार शासन करने योग्य नहीं है इसलिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. भाजपा नेता का कहना था कि बूटा सिंह ने यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी से बिना मंत्रणा किए विधानसभा भंग करने का निर्णय नहीं लिया होगा. इसलिए उन्हें राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. उन्होंने बूटा सिंह के इस्तीफ़े की भी मांग की. कांग्रेस की प्रतिक्रिया कांग्रेस ने सु्प्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कहा है कि इससे स्पष्ट है कि मंत्रिमंडल का इसमें कोई दोष नहीं है. कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में केंद्र सरकार को कहीं दोषी नहीं ठहराया गया है. उनका कहना था कि सरकार इस फ़ैसले को स्वीकार करेगी और जहाँ तक इस निर्णय के नतीजों का सवाल है तो उसके लिए कैबिनेट के फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए. उनका कहना था कि इस फ़ैसले पर कोई भी क़दम उठाने से पहले इसका अध्ययन किया जाना ज़रूरी है. वामपंथियों की राय यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देनेवाली सीपीएम ने कहा है कि फ़ैसले को देखते हुए राज्यपाल बूटा सिंह को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. सीपीएम पोलित ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद यह उपयुक्त होगा कि राज्यपाल इस्तीफ़ा दे दें. दूसरी ओर सीपीआई ने राज्यपाल की भूमिका पर बहस कराने की माँग की है. सीपीआई नेता डी राजा ने कहा कि राज्यपाल के पद के राजनीतिकरण को देखते हुए इसकी नियुक्त और भूमिका पर बहस होनी चाहिए. डी राजा ने कहा, '' बड़ा सवाल यह है कि क्या हमें राज्यपालों की ज़रूरत है और है तो उनकी क्या भूमिका होनी चाहिए. यह जटिल सवाल है और हमें इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए.'' | इससे जुड़ी ख़बरें 'बिहार पर बूटा का निर्णय असंवैधानिक'24 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नीतीश ने कामकाज शुरू किया24 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'बिहार विधानसभा भंग करना असंवैधानिक'07 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस राज्यपाल की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी30 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस बिहार के मसले पर जनहित याचिका30 मई, 2005 | भारत और पड़ोस 'सौदेबाज़ी को रोकने के लिए चुनाव ज़रूरी'25 मई, 2005 | भारत और पड़ोस यह लोकतंत्र की हत्या है: एनडीए23 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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