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सोमवार, 23 जनवरी, 2006 को 05:34 GMT तक के समाचार
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श्रीलंका में तनाव कम करने की कोशिश
सोल्हाइम तमिल विद्रोही नेता के साथ
युद्धविराम कराने में सोल्हाइम की भूमिका अहम रही थी
श्रीलंका में सरकार और एलटीटीई के बीच बढ़ते तनाव को रोकने के लिए नॉर्वे के एक विशेष दूत कोलंबो पहुँचे हैं.

आने वाले दिनों में एरिक सोल्हाइम श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और तमिल विद्रोहियों के नेता वी प्रभाकरन से बातचीत करेंगे.

सोल्हाइम पिछले कुछ वर्षों से श्रीलंका में शांति समझौता कराने के प्रयासों में लगे रहे हैं और उन्होंने ही सरकार और तमिल छापामारों के बीच युद्धविराम संधि कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

एरिक सोल्हाइम ऐसे समय पर श्रीलंका में वार्ताएँ शुरू कर रहे हैं जबकि हिंसा की घटनाओं को देखते हुए युद्धविराम के टूटने की आशंका व्यक्त की जाने लगी है.

यहाँ तक कि जब वे श्रीलंका पहुंचे तभी एक बारूदी सुरंग के धमाके में तीन सैनिक मारे गए जिसके लिए सरकार ने तमिल विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराया.

सरकार और विद्रोही, दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं.

साथ ही, दोनों पक्षों का कहना है कि वे युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए बातचीत करने को तैयार हैं, लेकिन यह बातचीत कहाँ हो इस पर असहमति बनी हुई है.

श्रीलंका सरकार का कहना है कि बातचीत 'एशिया में किसी भी जगह' हो सकती है मगर तमिल विद्रोही इस बात पर अड़े हैं कि बातचीत नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होनी चाहिए.

दोषारोपण

पिछले दिनों महिंदा राजपक्षे ने कहा था कि दिसंबर से लेकर अभी तक विद्रोहियों के हमलों में 70 से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं.

श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे ने तमिल विद्रोहियों को आगाह किया है कि "सरकार के धैर्य को उसकी कमज़ोरी न समझा जाए."

दूसरी ओर, तमिल विद्रोहियों पर श्रीलंकाई सेना के हमलों के आरोप भी लगते रहे हैं.

इन परिस्थितियों में सोल्हाइम के सामने चुनौती होगी कि वे किस तरह दोनों पक्षों को युद्धविराम को मज़बूत करने के लिए राज़ी कर पाते हैं.

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