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बुधवार, 11 जनवरी, 2006 को 10:25 GMT तक के समाचार
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उड़ीसा की घटना त्रासदीः सोनिया गांधी
सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने कहा कि आदिवासियों की माँगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
भारत के सत्ताधारी यूपीए गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उड़ीसा के कलिंगनगर शहर में पुलिस गोलीबारी में आदिवासियों की मौत को एक बड़ी त्रासदी बताया है.

दो जनवरी को वहाँ एक स्टील प्लांट का विरोध कर रहे आदिवासियों पर पुलिस के गोली चलाने से 12 आदिवासी मारे गए थे. हिंसा में एक पुलिसकर्मी की भी मौत हो गई थी.

उन्होंने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के बाद कहा कि केंद्र सरकार प्रत्येक पीड़ित के क़रीबी परिजन को छह-छह लाख रूपए देगी.

ये राशि राज्य सरकार के मुआवज़े से अलग होगी. उड़ीसा सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को पाँच-पाँच लाख रूपए देने की घोषणा की है.

सोनिया गांधी के साथ केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल और केंद्रीय गृह सचिव वी के दुग्गल भी कलिंगनगर गए थे.

उन्होंने वहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 200 को पिछले 10 दिनों से रोककर रखे हुए आदिवासी प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात की और कहा कि उनकी माँगों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा.

उनकी माँगों में स्टील प्लांटों के निर्माण के लिए ज़मीन लेने पर रोक के अलावा उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और वित्त मंत्री प्रफ़ुल्ल चंद्र घदेइ को हटाए जाने की माँग भी शामिल है.

आदिवासी उड़ीसा के जाजपुर ज़िले में स्थित कलिंगनगर में टाटा स्टील के एक नए प्लांट का विरोध कर रहे थे जब हिंसा हुई.

विरोध

मृतकों के शव
कलिंगनगर में दो जनवरी को पुलिस की गोलीबारी में 12 आदिवासी मारे गए थे

इस बीच उड़ीसा में आदिवासियों के विरोध और प्रदर्शन का सिलसिला जारी है.

बुधवार यानी आज प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्रों में सीपीआई-एमएल और लोक संग्राम मंच ने बंद का आह्वान किया है.

पिछले कई दिनों से प्रभावित क्षेत्र में राजनेताओं का आना-जाना लगा हुआ है.

पिछले रविवार को सीपीआई-एम नेता सीताराम येचुरी ने कलिंगनर का दौरा किया था.

इस बीच उड़ीसा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कलिंगनगर गोलीबारी की घटना की न्यायिक जाँच का दायित्व न्यायाधीश ए एस नायडू को सौंप दिया है.

पहले अदालत ने जाँच के लिए न्यायाधीश देने से मना कर दिया था.

राउरकेला में बंद

मंगलवार को हज़ारों आदिवासियों ने तीर-कमान लेकर राउरकेला शहर के पास रेल और सड़क मार्ग जाम कर दिया था जिसके कारण यातायात पर गंभीर असर पडा.

ये आदिवासी सरकारी क्षेत्र की कंपनी राउरकेला स्टील प्लांट से अपनी ज़मीन वापस माँग रहे थे जिसे 50 साल पहले अधिगृहीत कर लिया गया था.

वे ज़मीन से विस्थापित किए गए हर परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी दिए जाने की भी माँग कर रहे हैं.

उत्तेजित प्रदर्शनकारियों ने वहाँ तीन ट्रकों को जला दिया और छर सवारी और 11 मालगाड़ियों को रोककर रखा.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका विरोध पिछले डेढ़ साल से चल रहा है लेकिन माँगें अनसुनी किए जाने के कारण उन्हें आर्थिक नाकेबंदी का रास्ता अपनाना पडा.

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