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उड़ीसा में आदिवासियों ने बंद रखा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के उड़ीसा राज्य में आदिवासियों शनिवार को बंद का आयोजन किया जिसका राज्य भर में आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा. बंद से आसपास के राज्यों पर भी असर पड़ा है और आदिवासी समुदायों की ओर से समीपवर्ती राज्य छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी विरोध प्रदर्शन किया गया. विरोध की वजह से राज्य के स्कूलों, कॉलेजों को बंद कर दिया गया है. राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बंद के संदर्भ में शुक्रवार को लोगों से अपील की थी कि बंद के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखें. ग़ौरतलब है कि दो जनवरी 2006 को पुलिस कार्रवाई में 13 प्रदर्शनकारी आदिवासी मारे गए थे. कलिंगनगर के आदिवासी उस क्षेत्र में टाटा स्टील कंपनी की ओर से लगाए जा रहे एक नए कारखाने के निर्माण का विरोध कर रहे थे. उसी विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में आदिवासियों की मौत हो गई. बंद प्रदर्शनकारियों ने राज्य के वित्तमंत्री प्रफुल्ल घड़ी के आवास पर हमला करके तोड़फोड़ की और ऐसी ही घटनाओं की ख़बर बीजू जनतादल के पार्टी मुख्यालय से भी है. वित्तमंत्री प्रफुल्ल घड़ी कलिंगनगर से विधायक हैं जहाँ पिछले दिनों यह घटना हुई थी. प्रदर्शनकारियों ने कई जगह पर चक्का जाम किया है और प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पुतले भी जलाए हैं. बंद के कारण रेल और सड़क यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और कई ट्रेनों का आवागमन प्रभावित हुआ है. इस बीच जजपुर के दानगदी क्षेत्र में दो गुटों के बीच झड़प की भी ख़बर है. इनमें से एक गुट आदिवासियों का है और दूसरा उन लोगों का, जो इस कारखाने को लगाए जाने के पक्ष में है. हालाँकि राज्य से अभी तक किसी बड़ी अप्रिय घटना की कोई ख़बर नहीं आई है लेकिन कुछ जगहों पर आगजनी और झड़पों की भी ख़बर है. राज्य सरकार ने राजधानी भुवनेश्वर और कटक में बंद को देखते हुए व्यापक बंदोबस्त किए हैं. राज्यभर में अर्धसैनिक बलों की 164 कंपनियाँ तैनात की गई हैं और रैपिड एक्शन फ़ोर्स के जवान भी बड़ी संख्या में तैनात किए गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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