|
बाबा रामदेव की दवाओं को लेकर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरांचल सरकार ने कहा है कि बाबा रामदेव के आश्रम में बनी दवाओं की जाँच करवाई जाएगी कि उसमें किसी नियम क़ायदे का उल्लंघन तो नहीं हुआ है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा कारत के इस आरोप के बाद विवाद खड़ा हो गया है कि बाबा रामदेव के आश्रम में बन रही दवाओं में हड्डियों का चूरा मिलाया जा रहा है. उन्होंने इसके समर्थन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के उस पत्र का ज़िक्र किया था जिसमें कहा गया था कि बाबा रामदेव की फ़ार्मेसी में बन रही दवाओं में लेबलिंग और लाइसेंसिंग का उल्लंघन हो रहा है. इस आरोप का खंडन करते हुए बाबा रामदेव ने कहा था कि वे अपनी दवाओं की हर तरह की जाँच के लिए तैयार है और उन्होंने उल्टे आरोप लगाया था कि ये बहुराष्ट्रीय कंपनियों की साजिश है. उधर भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने भी बाबा रामदेव के पक्ष में बयान देते हुए कहा है कि ये योग और आयुर्वेद के ख़िलाफ़ है. आरोप-प्रत्यारोप अपनी योग कक्षाओं और विभिन्न रोगों की देसी दवाओं के लिए प्रसिद्ध बाबा रामदेव पर आरोप लगाते हुए वृंदा कारत ने कहा कि उनकी दवाओं में जानवरों और हड्डियों का चूरा मिलाया जा रहा है और इसकी जानकारी भी लोगों को नहीं दी जा रही है.
मंगलवार को अपने आरोप के समर्थन में वृंदा कारत ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का एक पत्र भी जारी किया. उत्तरांचल सरकार को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि इस बात की जाँच की जाए कि कहीं बाबा रामदेव की फार्मेसी में लेबलिंग और लाइसेंसिंग नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि बाबा रामदेव को उत्तरांचल की नारायण दत्त तिवारी सरकार संरक्षण दे रही है. लेकिन मंगलवार को ही इस आरोप का जवाब देते हुए बाबा रामदेव ने कहा था कि वे किसी भी प्रयोगशाला में अपनी दवाओं की जाँच के लिए तैयार हैं. उन्होंने वृंदा कारत के आरोपों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों की साजिश बताया था. जाँच दूसरी ओर उत्तरांचल सरकार ने इस मामले के सामने आने के बाद स्वीकार किया है कि उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का पत्र मिल गया है.
राज्य के मुख्य सचिव एम रामचंद्रन ने कहा है कि सरकार इस मामले की जाँच करवा रही है और कोशिश रहेगी कि इसकी रिपोर्ट जल्दी से जल्दी आ जाए. इसके तहत इस बात की जाँच की जाएगी कि दवाओं के लेबल पर उसमें शामिल पदार्थों की सूची सही रुप से छापी गई है या नहीं. उधर नारायण दत्त तिवारी ने कहा है कि उनके लिए वृंदा कारत और बाबा रामदेव दोनों आदरणीय हैं और वे इस विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. उल्लेखनीय है कि वृंदा कारत ने इससे पहले भी बाबा रामदेव पर आरोप लगाया था और उस समय उन्होंने कहा था कि उनकी फ़ार्मेसी से कई कामगारों को ग़ैर क़ानूनी ढंग से हटा दिया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें जापानी साध्वी की भूमिगत समाधि26 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस बाबा रामदेव का योग और उनके बड़े-बड़े दावे16 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस सत्य साईंबाबा: भगवान या...?18 जून, 2004 | भारत और पड़ोस विचित्र नामों वाले बाबा23 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस लखनऊ के मुसलमानों के हिंदू 'सहरी बाबा'24 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस ऐसे हैं 'लावारिस बाबा' | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||