|
सत्य साईंबाबा: भगवान या...? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी ने 'सीक्रेट स्वामी' के नाम से एक डॉक्यूमेंटरी फ़िल्म बनाई है. ब्रिटेन में इस फ़िल्म का गुरुवार रात प्रसारण हुआ. तान्या दत्ता की इस फ़िल्म में स्वयंभू भगवान और कथित आध्यात्मिक गुरु सत्यसाईंबाबा पर वर्षों से लगते रहे यौन दुराचारों के आरोपों की पड़ताल की गई है. फ़िल्म के अनुसार एक हैं बासव प्रेमानंद. वे भारत के कथित गुरुओं का भंडाफोड़ करने वालों में से एक हैं. उन्होंने 'फ़ेडरेशन ऑफ़ रैशनलिस्ट एसोसिएशन' का गठन किया है और 'इंडियन स्केप्टिक' यानी 'भारतीय संदेही' के नाम की एक पत्रिका निकालते हैं. इसमें बासव प्रेमानंद मानते हैं कि कथित आध्यात्मिक गुरु सत्य साईंबाबा दरअसल एक 'धूर्त' हैं और उनका भंडाफोड़ होना चाहिए. सुबूत
वे ख़ुद इस भंडाफोड़ की तैयारी में हैं और वे सत्यसाईं बाबा के ख़िलाफ़ पिछले तीस सालों से सुबूत जुटा रहे हैं. उनके घर हाल ही में चोर घुस आए थे. ऐसा एक महीने में तीसरी बार हुआ. प्रेमानंद का कहना है कि चोर उनके जुटाए हुए सुबूत चुराने आए थे. प्रेमानंद मानते हैं कि उनके पास जो सुबूत हैं वे यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि सत्यसाईं बाबा न केवल ठग हैं बल्कि वे एक यौन दुराचारी भी हैं. प्रेमानंद के अनुसार, "साईबाबा और कुछ नहीं एक माफ़िया हैं जो लोगों को ठगते हैं और अपने लिए पैसा बनाते हैं." बासव प्रेमानंद मानते हैं कि मनगढ़ंत कथाओं और अंधविश्वास भारत जैसे भोलेभाले देश के लिए अभिशाप बना हुआ है और ज़रुरत है कि एक वैज्ञानिक सोच विकसित की जाए. बड़े-बड़े भक्त उन्होंने 1976 से सत्यसाईबाबा के ख़िलाफ़ एक मुहिम छेड़ रखी है. उस सत्यसाईं बाबा के ख़िलाफ़ जिनके भारत सहित दुनिया भर में लाखों भक्त हैं और ये भक्त उन्हें भगवान का अवतार मानते हैं. यह चर्चा कई बरसों से होती रही है कि सत्यसाईं बाबा युवा पुरुष भक्तों का यौन शोषण करते रहे हैं. 1976 में उनके एक अमरीकी भक्त टॉल ब्रुक ने एक किताब लिखकर साईबाबा के यौन शोषण का ज़िक्र किया था.
लेकिन पिछले चार सालों में, ख़ासकर इंटरनेट के आ जाने के बाद साईं बाबा के ख़िलाफ़ शिकायतों का अंबार लग गया है. बीबीसी की फ़िल्म में दिखाए गए अलाया राम और मार्क रोश दो ऐसे व्यक्ति हैं जो गुरु के यौन शोषण का विस्तृत विवरण दे रहे हैं. इन दोनों व्यक्तियों के अनुभवों में तीस सालों का फ़र्क है लेकिन उनकी कहानी एक जैसी प्रतीत होती है. दोनों बताते हैं कि सत्यसाईं बाबा ने अपने हाथों से उनके जननांगों पर तेल लगाया. हालांकि अब तक स्वयंभू भगवान साईबाबा के ख़िलाफ़ बोलने वाले पश्चिमी देशों के ही लोग हैं लेकिन प्रेमानंद का कहना है कि कई भारतीय भी दावा करते हैं कि उनका यौन शोषण हुआ लेकिन वे सामने आने में डरते हैं. हालांकि यह डर अस्वाभाविक भी नहीं लगता क्योंकि सत्यसाईबाबा के भक्तों में भारत के बड़े बड़े लोग शामिल हैं. इनमें पूर्व राष्ट्रपति हैं, पूर्व प्रधानमंत्री हैं, जज हैं, सेना के जनरल हैं और ये सब दक्षिण भारत के पुत्तपार्थी स्थित आश्रम में 'आशीर्वाद' लेने आते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी तो लेटरहैड पर लिख दे चुके हैं कि साईबाबा पर लगाए जा रहे आरोप "ग़ैरज़िम्मेदाराना और मनगढ़ंत" हैं. उनके संबंध राज्य की पुलिस से भी बहुत अच्छे हैं. हालांकि इनमें से किसी ने भी प्रेमानंद को धमका कर रोकने की कोशिश नहीं की है. कई शिकायतें आश्चर्य नहीं कि साईबाबा के कई भक्त प्रेमानंद से नाराज़ हैं. अब तक बासव प्रेमानंद की हत्या के चार प्रयास हो चुके हैं और उनके शरीर पर पिटाई से आई चोट के कई निशान हैं. प्रेमानंद ने साईबाबा के ख़िलाफ़ मुकदमे दायर किए हैं और कई शिकायतें की हैं. 1993 में साईबाबा पर उनके आश्रम के ही कुछ लोगों ने हमला कर दिया था. उनके हाथों में चाकू थे. प्रेमानंद का कहना है कि पुलिस ने उस मामले की जाँच रोक दी क्योंकि उससे कई परतें खुल जातीं. इसके ख़िलाफ़ प्रेमानंद अदालत में भी गए और मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी गया. मुकदमा तो वे सुप्रीम कोर्ट में हार गए लेकिन उनका कहना है कि यह उनके जीवन की बड़ी लड़ाई है और उन्होंने सुबूत जुटाना जारी रखा हुआ है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||