|
जापानी साध्वी की भूमिगत समाधि | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान की एक हिंदू साध्वी ने 'विश्व शांति के लिए' तीन दिन खाने-पानी के बिना ही ज़मीन के नीचे बिताए. साठ वर्षीय साध्वी काइको अइकावा तीन दिन के बाद ज़मीन के नीचे से निकलीं और कहा कि "समाधि लगाने के बाद उनकी काया और आत्मा दोनों निर्मल हो गए". जापानी साध्वी ने मध्य प्रदेश में ग्वालियर में पिछले दिनों तीन दिन की यह समाधि लगाई. ग्वालियर के एक मैदान में सैकड़ों भक्तों की जय-जयकार के बीच काइको अइकावा ज़मीन में एक गहरे गड्ढे में बने एक बहुत छोटे से कक्ष में चली गईं जहाँ एक छोटी खाट, एक कंबल और एक त्रिशूल था. उनके इस गड्ढे में जाने के बाद ऊपर से टीन और पॉलीथीन की चादरें बिछा दी गईं, उसके ऊपर से मिट्टी का लेप लगा दिया गया. साध्वी अइकावा के 25 जापानी शिष्य भी उनके साथ भारत आए थे और वहीं मौजूद थे. अइकावा का कहना था कि वे संघर्षों में घिरी इस दुनिया में शांति लाने के लिए अपनी ओर से प्रयास कर रही हैं. उन्होंने कहा, "समाधि अध्यात्म की पराकाष्ठा है, बिना खाना-पानी के ध्यान लगाने वाले भक्त के लिए समय जैसे रूक जाता है इसलिए ऐसा करना संभव हो पाता है." जापानी साध्वी की यह समाधि उनके अध्यात्मिक गुरू पायलट बाबा के विश्व शांति अभियान के तहत आयोजित की गई थी. कई वैज्ञानिकों का कहना है कि वे इस तरह की 'समाधियों' को शक की नज़र से देखते हैं. प्रोफ़ेसर एपीएस चौहान ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "इस तरह के हथकंडों से साधुओं को प्रचार तो मिल सकता है लेकिन विश्व शांति कैसे होगी यह समझ से परे है." एक तर्कवादी संगठन चलाने वाले दिनेश मिश्र का कहना है कि इसमें कोई चमत्कार नहीं है, कोई भी व्यक्ति थोड़े से अभ्यास के बाद ऐसा कर सकता है, ऐसे गड्ढों में पाँच सात दिन तक साँस लेने के लायक़ हवा रहती है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||