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शनिवार, 26 जून, 2004 को 07:21 GMT तक के समाचार
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लाहौर की यात्रा पर निकले लुढ़कन बाबा

लुढ़कन बाबा
पिछले 22 वर्षों से लुढ़कते हुए संदेश फैला रहे लुढ़कन बाबा अब लाहौर जाना चाहते हैं
इकहरा शरीर, लंबी दाढ़ी, उलझे बाल और लुढ़क-लुढ़क कर सख़्त हो चुकी चमड़ी वाले लुढ़कन बाबा मध्य प्रदेश के रतलाम से लाहौर तक लुढ़कने के लिए निकले हैं.

बाबा लोगों में विश्व शांति, राष्ट्रीय एकता और मानव प्रेम की भावना जगाना चाहते हैं.

लुढ़कन बाबा एक प्याली चाय और गाँजा भरी तीन सिगरेटें पीने के बाद बताने को तैयार हुए कि यात्रा का ये अनोखा तरीक़ा उन्होंने क्यों चुना.

बाबा बोले,"जिस तरह बच्चा माँ की गोद में खेलता और लोटता है, मैं भी धरती माँ की गोद में लोटता हूँ".

दिल्ली में लटकी यात्रा

 जिस तरह बच्चा माँ की गोद में खेलता और लोटता है, मैं भी धरती माँ की गोद में लोटता हूँ
लुढ़कन बाबा

आसमान से बरसती आग और तपती ज़मीन पर लुढ़कते हुए लुढ़कन बाबा रतलाम से दिल्ली पहुँच चुके हैं.

मगर दिल्ली में उनकी यात्रा सत्ता के गलियारों और बाबुओं की फ़ाइलों में थोड़ी उलझ पड़ी.

पहले तो छह दिन तक मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री उमा भारती उनसे 'आशीर्वाद' लेने नहीं आ पाईं.

उसके बाद पासपोर्ट और वीज़ा के चक्कर ने बाबा को घेर लिया.

बाबा बताते हैं कि उन्होंने पाँच महीने से सरकार को अर्जी दे रखी है मगर सरकार है कि मानती ही नहीं.

मुशर्रफ़ की आस

अब बाबा को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से मदद की आस है.

लुढ़कन बाबा कहते हैं,"अगर मुशर्रफ़ साहब क्रिकेट टीम को बुला सकते हैं, आगरा और लाहौर की शांति यात्राएँ हो सकती हैं, प्रतिनिधिमंडल आ-जा सकते हैं तो वे मुझे भी अवश्य बुलाएँगे".

लेकिन उन्होंने ये भी तय कर रखा है कि अगर बात नहीं बनी तो क्या करेंगे.

बाबा बताते हैं मामला लटकने पर वे नेपाल की राजधानी काठमांडू चले जाएँगे.

बाबा की कहानी

लुढ़कन बाबा
लुढ़कन बाबा को चाय और सिगरेट का शौक है और गांजे को वे ईश्वर का प्रसाद मानते हैं

लुढ़कन बाबा पिछले 22 वर्षों से लुढ़कते हुए यात्राएँ कर रहे हैं.

वह रोज़ 10 से 15 किलोमीटर लुढ़कते हैं.

भक्त उन्हें चंदा देते हैं और उनसे उनका लुढ़कना जारी है.

वह रतलाम से वैष्णोदेवी और अयोध्या तक की यात्राएँ कर चुके हैं.

यही नहीं लुढ़कन बाबा लंदन की सड़कों पर भी तीन किलोमीटर लोटकर लोगों को ज्ञान बाँट चुके हैं.

बाबा को चाय और सिगरेट ख़ास तौर से पसंद हैं औऱ गांजे को वे ईश्वर का प्रसाद मानते हैं.

बाबा के चेले

उनके 25 चेले-चेलियाँ उनके साथ भजन-कीर्तन करते हुए चलते हैं.

उनके भक्तों में विश्व शांति पर धाराप्रवाह प्रवचन करने वाली बाल संन्यासिनी भुवनेश्वरी भी हैं तो जींस और टॉप पहनी हुई प्रतिभा कुँवर भी.

लुढ़कन बाबा भले ही ही ज़मीन पर लुढ़क रहे हों, उनके चेले आधुनिक संचार व्यवस्था तक का उपयोग करते हैं. उनके पास मोबाईल कैमरा फ़ोन भी हैं और प्रसाद के तौर पर वे बाबा से मिलने आने वालों की तस्वीरें खींच कर बाँटा करते हैं.

उनका कहना है कि अपनी यात्रा में लुढ़कन बाबा पूरे रास्ते भक्तों की बीमारियाँ भी ठीक करते रहते हैं.

लेकिन बाबा कहते हैं कि उन्हें वे मठाधीश ज़रा भी नहीं सुहाते जो धर्म को व्यापार समझते हैं.

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