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सोने की पालकी ननकाना साहिब पहुँची | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सैकड़ों सिख तीर्थयात्रियों का एक जत्था पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब पहुँचा जहाँ एक रंगारंग समारोह आयोजित किया गया. इस समारोह में भारतीय पंजाब और पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्रियों ने भी हिस्सा लिया. तीर्थयात्री सोने की एक पालकी के साथ दिल्ली से शोभायात्रा लेकर ननकाना साहिब पहुँचे थे. दिल्ली से ननकाना साहिब तक का 670 किलोमीटर का सफ़र इन तीर्थयात्रियों ने सड़क मार्ग से दो दिन में पूरा किया. दोनों मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर से गुरूद्वारा जन्मस्थान पहुँचे जहाँ सड़क के दोनों ओर हाथ में गुलदस्ता लिए बच्चों ने उनका स्वागत किया. इस मौक़े पर भारतीय पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि दोनों पंजाबों के मुख्यमंत्री अपनी सरकारों से अनुरोध कर रहे हैं कि नागरिकों की आवाजाही के लिए वीज़ा के नियमों में ढील दी जाए. पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एजाज उल हक़ ने कहा कि वे चाहते हैं कि दोनों देशों के लोगों के आने-जाने के लिए नियमों को आसान बनाया जाए. भारत से लाई गई सोने की पालकी को दोनों मुख्यमंत्रियों ने उस स्थान पर रखा जहाँ अभी संगमरमर की पालकी रखी गई है. संभावना व्यक्त की जा रही है कि संगमरमर की पालकी को हटाकर उसकी जगह सोने की पालकी रखी जाएगी लेकिन भारत के सिख समुदाय के कुछ लोग इस योजना को सही नहीं मानते. उनका कहना है कि पुरानी संगमरमर की पालकी को नहीं हटाया जाना चाहिए, ऐसी स्थिति में यह भी संभव है कि भारत से आई सोने की पालकी को काँच के एक बक्से में सजाकर रख दिया जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'तेरह अप्रैल विश्व पगड़ी दिवस हो'13 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस लाहौर के लज़ीज़ खाने और मेहमाननवाज़ी08 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस उपेक्षित है हड़प्पा की धरोहर03 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस लाहौर में बारातियों जैसा स्वागत26 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस ब्रिटेन पंजाबियों की पहली पसंद बना26 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस समझौता एक्सप्रेस का सफ़र बहाल15 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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