BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 08 अप्रैल, 2004 को 09:23 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
लाहौर के लज़ीज़ खाने और मेहमाननवाज़ी

लाहौर की मशहूर पान की दुकान
पान की ऐसी दुकान जहाँ ग्राहकों पर फूल बरसाए जाते हैं
पुरानी कहावत है--जिन लाहौर देख्या नईं, वो जम्या नईं, यानी जिसने लाहौर नहीं देखा उसका जन्म ही नहीं हुआ.

इस कहावत में यह भी जोड़ा जा सकता है कि--जिसने लाहौर की फूड स्ट्रीट नहीं देखी, वह क्या जाने ज़ायकों के बारे में.

अनारकली बाज़ार और ग्वालमंडी फूड स्ट्रीट, साफ़-सुथरी सड़कें जो गाड़ियों के लिए बंद हैं. सड़कों के दोनों तरफ़ पुरानी हवेलियाँ, झरोखे और मंदिरों के मेहराब, सजे हुए खंभे.

शीशम और सागवान के नक्काशीदार दरवाज़े और चौखट, जब रात की पीली रौशनी में ऐसे चमकते हैं मानो दीवाली की रात हो.

मकानों पर लगे पत्थर ज्यौं के त्यौं हैं, विद्या निवास, गोपाल भवन, माधव का अहाता. ये नाम ऐसे हैं कि पुरानी स्मृतियों को सजीव सा बना देते हैं.

कहीं-कहीं हनुमान और गणेश की मूर्तियाँ भी दिख जाती हैं, दीवारों पर गढ़ी गई इन मूर्तियों को लाहौर वालों ने बहुत संभालकर रखा है.

लाहौर का फूड स्ट्रीट
रात के दो बजे तक रौनक रहती है फूड स्ट्रीट में

इन हवेलियों, कोठियों और मकानों की निचली मंज़िल पर खाने की दुकाने हैं, ग्वालमंडी में खाने के अलावा कुछ नहीं मिलता जबकि अनारकली बाज़ार में बहुत कुछ मिलता है--हस्तकला की चीज़ें, चूड़ियाँ, चप्पलें और नक्काशीदार चाकू-तलवार.

सड़क किनारे गुलज़ार इन रेस्तराँओं के बेयरे खाने की चीज़ों का नाम इस तरह लेते हैं जैसे चौथी क्लास का बच्चा पहाड़ा सुनाता है--अनवरत, बिना रूके, सैकड़ों तरह के कवाब, दाल, सब्ज़ियाँ, तरह-तरह के व्यंजन पाकिस्तानी ही नहीं, चीनी और इतालवी भी.

साथ में, दूध, दही, लस्सी, आइसक्रीम और मिठाइयाँ. जब तक आप अपने पसंद की चीज़ पा न लें तब तक वेटर रूकेगा नहीं-- चाट, दही भल्ले, गोलगप्पे, टिक्कियाँ...

और हाँ, लाहौरी टकाटक...तवे पर घोलनी की ताल पर थिरकिए और खाने का मज़ा लीजिए, कभी तीन ताल तो कभी झप ताल, आपके ठीक पीछे खड़े होते हैं क्लैरिनेट पर फ़िल्मी गानों की धुन बजाने वाले गुमनाम कलाकार.

अनारकली बाज़ार और ग्वालमंडी की इन गलियों में रात के दो बजे तक रौनक रहती है, माहौल बिल्कुल सुव्यवस्थित और सुहाना.

फूड स्ट्रीट
लोग ऐसे बैठते हैं जैसे अपने घर के आँगन में हों

जो लाहौर आता है, इन गलियों में रम जाता है. औरत, बूढ़े, बच्चे सब ख़ुश नज़र आते हैं, ऐसा लगता है कि अपने आँगन में बैठे हों.

अनारकली बाज़ार में ही पान की वो दुकान है जहाँ पहुँचते ही आपके ऊपर गुलाब की पँखुड़ियाँ बरसाई जाती हैं. कहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा पानदान भी इसी दुकान में है.

पान और पान मसालों की तो पूछिए मत, खुशबू से ही दिल भर जाता है.

मेहमाननवाज़ी तो पाकिस्तानी संस्कृति का अटूट हिस्सा बन चुकी है, जहाँगीर के ससुर की हवेली यहीं अनारकली थाने के पास थी.

अपनी ससुराल में मुग़ल बादशाह की जैसी ख़ातिरदारी होती होगी उसका अंदाज़ा आप अनारकली बाज़ार की किसी दुकान पर बैठकर लगा सकते हैं.

और अगर आप भारत से आए हैं तो फिर क्या बात है. चखा-चखाकर ही आपका पेट भर देंगे, लाहौरवाले, और जब आप यहाँ से निकलेंगे तो यक़ीन मानिए, अपना दिल आपको इन्हीं के पास छोड़कर जाना होगा.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>