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राज ठाकरे ने शिवसेना के पद छोड़े | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना में अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है. पार्टी में कामकाज पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा है कि पिछले दस सालों से पार्टी में उनकी उपेक्षा हो रही थी. इसके बाद राज ठाकरे के समर्थकों ने 'सामना' के संपादक और शिवसेना नेता संजय राउत की कार पर हमला किया. दो दिन पहले राज ठाकरे ने बाल ठाकरे के बेटे और शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के ख़िलाफ़ एक पत्र बाल ठाकरे को लिखा था इसके बाद उन्हें मनाने की कोशिशें भी हुईं लेकिन आज उन्होंने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी. वे शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य थे और पार्टी के युवा संगठन और विद्यार्थी सेना का नेतृत्व कर रहे थे. इस बीच उन्हें कांग्रेस में शामिल होने का न्यौता भी मिला लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी पार्टी में शामिल नहीं होने जा रहे हैं. इस्तीफ़ा देते हुए उन्होंने पार्टी की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उल्लेखनीय है कि बाल ठाकरे के बेटे और भतीजे के बीच विवाद पुराना है और इसी साल अगस्त में यह एक बार फिर सतह पर आया था लेकिन बाल ठाकरे की मध्यस्थता के बाद इस विवाद को दबा दिया गया था. लेकिन इसके बाद उद्धव ठाकरे की कार्यप्रणाली और अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे. पिछले हफ़्ते ही शिवसेना की कोशिशें के बावजूद राणे ने उपचुनाव में भारी भरकम जीत दर्ज की थी. इस्तीफ़ा मालवण में नारायण राणे की इस जीत के बाद राज और उद्धव ठाकरे के बीच विवाद एक बार फिर सतह पर उभरा और उन्होंने पार्टी प्रमुख बाल ठाकरे को उद्धव ठाकरे के ख़िलाफ़ एक चिठ्ठी लिखी. ऐसी ही एक चिट्ठी गत अगस्त में राज ठाकरे ने और लिखी थी इसमें उद्धव ठाकरे का ज़िक्र किए बिना कहा कहा गया था कि पार्टी के निष्क्रिय लोगों को पार्टी से निकाल देना चाहिए. उस समय उद्धव के क़रीबी और पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादक संजय राउत ने राज ठाकरे के ख़िलाफ़ टिप्पणियाँ भी प्रकाशित की थी. मुंबई में एक आमसभा में रविवार को राज ठाकरे ने कहा, "शिवसेना का गठन मेरे जन्म से पहले हो चुका था और शिवसेना मेरे ख़ून में है." उन्होंने कहा, "शिवसेना में अब दलाल आ गए हैं जो पहले नहीं थे." उन्होंने कहा कि वे पिछले दस सालों से उपेक्षा के शिकार हैं लेकिन वे पार्टी के हित में चुपचाप थे. राज ठाकरे ने कहा कि इस्तीफ़े का फ़ैसला उनका अपना है और वे इसके लिए किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि उनके इस क़दम के बाद अब पार्टी राज ठाकरे के ख़िलाफ़ निष्कासन जैसी कोई कार्रवाई कर सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें नारायण राणे की भारी भरकम जीत22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस शिवसेना में बेटा-भतीजा विवाद चरम पर17 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस राणे ने इस्तीफ़ा दिया, कदम नए नेता12 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस नारायण राणे शिवसेना से निष्कासित03 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस मुंबई पुलिस की ठाकरे के विरुद्ध कार्रवाई31 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस 'अयोध्या: मंगल पांडे का स्मारक बना दो'02 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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