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जेएनयू में मनमोहन सिंह का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सोमवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 116वीं जयंती के अवसर पर मनमोहन सिंह जेएनयू परिसर में एक आयोजन में शामिल होने गए थे. वहाँ उनके भाषण के दौरान कुछ छात्रों ने नारेबाज़ी शुरू कर दी और काले झंडे दिखाने लगे. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रधानमंत्री ने शोर-शराबे के बीच ही अपना भाषण पूरा किया और तुरंत सभा से चले गए. विरोध करनेवाले छात्र वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन या आइसा के सदस्य बताए गए हैं. अफ़सोस जेएनयू छात्र संगठन के नेताओं ने इस घटना पर अफ़सोस जताया है. जेएनयू छात्र संघ की सह सचिव अरानी सिन्हा ने कहा,"हमने सभी छात्रों से अपील की थी कि वे प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान बाधा न खड़ी करें लेकिन जो हुआ वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है". छात्र संघ नेताओं ने कहा कि उनके सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद अवश्य थे और वे इस संबंध में उनको ज्ञापन देना चाहते थे जो उन्होंने दिया भी. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर के कुछ मुद्दों और विदेश नीति से जुड़े कुछ बिंदुओं पर वे सरकार की राय से असहमत थे. इनमें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग में ईरान के परमाणु मुद्दे को सुरक्षा परिषद में भेजने के लिए भारत का समर्थन में मतदान करना और भारत-अमरीका संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे मुद्दे शामिल थे. | इससे जुड़ी ख़बरें जेएनयू, जवानी और वामपंथ30 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस 'ईरान पर ग़लती न दोहराए सरकार'13 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'ईरान पर सख़्त प्रस्ताव का विरोध करेंगे'07 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस ईरान पर प्रधानमंत्री का स्पष्टीकरण01 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना ईरान मुद्दे पर वामपंथी अभी भी नाराज़28 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत ने कहा: फ़ैसला ईरान के हित में26 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना ईरान पर भारत ने दिया स्पष्टीकरण25 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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