|
'ईरान पर सख़्त प्रस्ताव का विरोध करेंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आने वाला प्रस्ताव अगर कठोर हुआ तो भारत इसके विरोध में मत डाल सकता है. इसी साल सितंबर में भारत ने ईरान के ख़िलाफ़ एक प्रस्ताव का समर्थन किया था. इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर ईरान परमाणु अप्रसार संधि का पालन नहीं करता है तो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को ये अधिकार होगा कि वह ये मामला सुरक्षा परिषद में ले जाए. ईरान ने चेतावनी दी थी कि वह उन देशों के साथ व्यापार समझौते की समीक्षा करेगा जिन देशों ने उसके ख़िलाफ़ मत दिया था. विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा कि वे ये स्वीकार नहीं कर सकते कि आईएईए की बैठक में ईरान के ख़िलाफ़ कोई कठोर क़दम उठाया जाए. उन्होंने कहा कि भारत कोई भी फ़ैसला अपना हित ध्यान में रखते हुए करेगा. सितंबर में आईएईए की बैठक में प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के भारत के फ़ैसले की आलोचना हुई थी और सरकार में शामिल वामपंथी दलों ने भी इसकी आलोचना की थी. लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट किया था कि ईरान को लेकर उसके रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है. सरकार ने कहा था कि भारत हमेशा से ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करता आया है. उस समय भारत पर ये आरोप लगा था कि अमरीका के दवाब में उसने ईरान के ख़िलाफ़ मतदान किया था. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी भारत की ईरान नीति पर स्पष्टीकरण दिया था और कहा था कि भारत का वोट ईरान के ख़िलाफ़ नहीं था. | इससे जुड़ी ख़बरें बातचीत बहाली के लिए ईरान का न्यौता06 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना ईरान ने निरीक्षण की इजाज़त दी03 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना ईरान मुद्दे पर वामपंथी अभी भी नाराज़28 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस गैस समझौते पर असर नहीं:ईरान 28 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पाइप लाइन पर भारत-ईरान बैठक03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस गैस लाइन के अहम पहलुओं पर चर्चा13 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस 'भारत-पाक भी संधि के दायरे में आएँ'03 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||