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बुधवार, 28 सितंबर, 2005 को 17:24 GMT तक के समाचार
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गैस समझौते पर असर नहीं:ईरान
गैस पाइपलाईन
समझौते के तहत भारत अगले 25 वर्षों तक हर साल 50 लाख टन एलएनजी या लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस का आयात कर सकता है
ईरान ने कहा है कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर भारत के रुख़ के बावजूद उसका 22 अरब डॉलर के गैस समझौते से पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है.

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक भारतीय समाचारपत्र में प्रकाशित इस रिपोर्ट का खंडन किया कि गैस परियोजना पर संदेह के बादल छा गए हैं.

इस समझौते के तहत भारत अगले 25 वर्षों तक हर साल 50 लाख टन एलएनजी या लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस का आयात कर सकता है.

उल्लेखनीय है कि भारत ने पिछले शनिवार को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने के पक्ष में मतदान किया था.

इसके बाद मंगलवार को ईरान सरकार ने ये कहा कि वह भारत जैसे उन देशों के साथ आर्थिक सहयोग पर फिर से विचार करेगा जिन्होंने ईरान पर यूरोपीय देशों के प्रस्ताव का समर्थन किया.

समीक्षा नहीं

लेकिन ईरान के वरिष्ठ अधिकारी अली आग़ा मोहम्मदी ने बुधवार को गैस योजना पर स्थिति स्पष्ट की.

 हम भारत के साथ अपने मौजूदा संबंधों की समीक्षा नहीं करना चाहते और उनके ईरान के विरूद्ध वोट देने से गैस योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा
अली आग़ा मोहम्मदी, ईरानी अधिकारी

उन्होंने कहा, "हम भारत के साथ अपने मौजूदा संबंधों की समीक्षा नहीं करना चाहते और उनके ईरान के विरूद्ध वोट देने से गैस योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा."

वैसे ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली आग़ा मोहम्मदी ने तेहरान में बीबीसी संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन से बात करते हुए भारत के रवैये पर आश्चर्च प्रकट किया.

उन्होंने कहा, "हमारे भारत के साथ कई क्षेत्रों और धार्मिक मामलों में अच्छे और गहरे संबंध थे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग में उनका बर्ताव बिल्कुल अजीब था. हमने अपेक्षा नहीं की थी कि वे हमारे विरूद्ध वोट डालेंगे."

भारत की स्थिति

दिल्ली में ईरान के राजदूत ने भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह से मुलाक़ात की है और उनको अपनी हताशा से अवगत कराया है.

भारतीय विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा है कि विदेश मंत्री ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि उसने किस पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर प्रस्ताव के पक्ष में वोट देने का फ़ैसला किया.

लेकिन प्रवक्ता ने कहा कि ईरानी राजदूत ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि ईरान भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे अपने व्यापक संबंधों पर फिर से विचार करना चाहता है.

भारत सरकार ने शनिवार के मतदान के बाद से ही अपना ये रुख़ क़ायम रखा है कि उसपर मतदान के दौरान अमरीका की ओर से किसी तरह का कोई दबाव था.

अमरीका ने सहयोग के लिए भारत का आभार प्रकट किया है.

ईरान अमरीका पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाता है जबकि ईरान कहता है कि उसके परमाणु कार्यक्रम का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीक़े से ऊर्जा का उत्पादन है.

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