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नटवर सिंह प्रधानमंत्री से मिले | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेशमंत्री नटवर सिंह ने रविवार दोपहर प्रधानमंत्री से उनके निवास पर मुलाकात की. बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए विदेशमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री से उनकी बातचीत हुई जिसमें वोल्कर कमेटी की रिपोर्ट और भारत की विदेश नीति पर चर्चा की गई. हालांकि वो अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे या नहीं या फिर क्या उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से इस्तीफ़ा देने के निर्देश दिए गए हैं, ऐसे सवालों पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की. इस बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नारायणन भी मौजूद थे. इससे पहले प्रधानमंत्री निवास पर केंद्र सरकार की एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई जिसमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, गृहमंत्री शिवराज पाटिल, वित्तमंत्री पी चिदंबरम, मानव संसाधन एवं विकासमंत्री अर्जुन सिंह और क़ानून मंत्री हंसराज भरद्वाज सहित कई वरिष्ठ मंत्री उपस्थित थे. इराक़ में 'तेल के बदले अनाज कार्यक्रम' की जाँच करने वाली वोल्कर समिति की रिपोर्ट में विदेश मंत्री नटवर सिंह के नाम आने के बाद से यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है. ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने गुरुवार को घोषणा की थी कि इराक़ में 'तेल के बदले अनाज कार्यक्रम' की जाँच करने वाली वोल्कर समिति की रिपोर्ट में विदेश मंत्री नटवर सिंह के नाम लिए जाने को लेकर वह गंभीर है. वोल्कर समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्यक्रम से कांग्रेस और विदेश मंत्री नटवर सिंह को आर्थिक लाभ पहुँचा है. संयुक्त राष्ट्र ने 'तेल के बदले अनाज' कार्यक्रम में भ्रष्टाचार की जाँच करने के लिए वोल्कर समिति का गठन किया था जिसमें दो हज़ार से ज़्यादा विदेशी कंपनियों पर सद्दाम हुसैन की सरकार को अवैध भुगतान करने का आरोप लगाया है. घेराव उधर विपक्ष ने इस मामले को और ज़ोर देना शुरू कर दिया है. भाजपा प्रवक्ता अऱुण जेटली में दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मामले की जाँच सीबीआई से कराई जानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वोल्कर मामले पर दोहरे मापदंड अपना रही है. तहलका मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि फ़ुकन आयोग की जाँच को केंद्र सरकार ने सीबीआई को सौंप दिया तो फिर इस मामले में सीबीआई से जाँच कराने में सरकार क्यों कतरा रही है. उन्होंने कहा कि तहलका मामले में तो सारे सबूत देश के अंदर ही थे फिर भी इसे सीबीआई को सौंपा गया जबकि वोल्कर कमेटी के मामले में सारे सबूत देश के बाहर हैं. इसके बावजूद इसे सीबीआई को क्यों नहीं सौंपा जा रहा है. तमाम कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए अरुण जेटली ने कहा कि इस मामले में जो भी लोग शामिल हैं, उनके ख़िलाफ़ तमाम आपराधिक मामले बनते हैं. उन्होंने कहा कि विदेशमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा दे देना चाहिए और सरकार को चाहिए कि उन्हें तब तक मंत्रिमंडल से बाहर रखें, जबतक जाँच पूरी नहीं हो जाती है. | इससे जुड़ी ख़बरें नटवर सिंह ने इस्तीफ़े की माँग ठुकराई05 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस वोल्कर रिपोर्ट पर फ़ैसला जल्द: सरकार03 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस वामपंथी नटवर के समर्थन में आए 04 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भाजपा ने नटवर को हटाने की माँग की03 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'नटवर के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच नहीं'30 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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