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लाल क़िला हमले में मौत की सज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली की एक अदालत ने लाल क़िले पर हमले के मामले में एक पाकिस्तानी नागरिक को मौत की सज़ा सुनाई है. पाँच वर्ष पहले दिल्ली के लाल क़िले पर चरमपंथी हमला हुआ था जिसमें दो पुलिसकर्मी और एक आम नागरिक की मौत हो गई थी. पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद आरिफ़ उर्फ़ अशफ़ाक सहित छह अन्य लोगों को अदालत ने पिछले सप्ताह इस हमले का दोषी करार दिया था लेकिन उन्हें सज़ा आज सुनाई गई है. दोषी पाए गए अन्य लोगों में नज़ीर अहमद क़ासिद और उनके बेटे फ़ारूक़ को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है. इनके अलावा अशफ़ाक़ की भारतीय पत्नी रहमाना सहित अन्य चार लोगों को सात वर्ष कारावास की सज़ा सुनाई गई है. सज़ा पाने वाले सभी लोगों का कहना है कि वे बेकसूर हैं और उनके वकीलों ने कहा है कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे. 22 दिसंबर 2000 को लाल क़िले पर हुए हमले की ज़िम्मेदारी लश्करे तैबा ने ली थी. अदालत ने जिन चार लोगों को दोषमुक्त क़रार दिया है उनमें मूलचंद, राजीव मलहोत्रा, देवेंदर और शहंशाह हैं. इन लोगों पर दोषी लोगों के लिए राशनकार्ड बनाने और सहायता पहुँचाने का आरोप था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'चरमपंथी गतिविधियों में कमी नहीं'15 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'गोधरा हमला आतंकवादी षडयंत्र नहीं'24 मई, 2005 | भारत और पड़ोस पुंछ में बैंक पर हमला, सात घायल15 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस पुलिस शिविर के हमलावर मारे गए12 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस संसद हमले में रिहाई के ख़िलाफ़ याचिकाएँ19 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस लाल क़िले को मिली सेना से मुक्ति22 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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