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लाल क़िले को मिली सेना से मुक्ति
दिल्ली का ऐतिहासिक लाल क़िला क़रीब साढ़े पाँच दशक के बाद सेना के हाथों से लेकर पर्यटन मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को सौंप दिया गया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि इस मुग़लकालीन इमारत का रखरखाव और विकास विश्व की एक धरोहर के रूप में किया जा सके. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नांडीस ने प्रतीकात्मक रूप में लाल क़िले की एक तस्वीर वाला स्मृति चिन्ह पर्यटन और संस्कृति मंत्री जगमोहन को सोमवार को भेंट किया. लाल क़िले के दिल्ली गेट पर लगाए गए इस स्मृति चिन्ह को भेंट करते हुए फ़र्नांडीस कुछ भावुक होते हुए कहा कि सेना ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्षों तक लाल क़िले का इस्तेमाल किया.
"लेकिन अब वक़्त आ गया है कि लाल क़िले जैसी धरोहर को सेना के हाथों से लेकर दुनिया भर के पर्यटकों के देखने के लिए खोल दिया जाए." रक्षा मंत्री ने कहा, "सेनाएं स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही लाल क़िले में थीं. सेनाओं का इतिहास इस क़िले से जुड़ गया है लेकिन हमारी ऐतिहासिक समृद्धि और परंपरा की झलक अब दुनिया को दिखाने का वक़्त आ गया है." लचीलापन जगमोहन ने इस लचीलेपन के लिए रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडीस का शुक्रिया अदा किया जिसकी बदौलत लाल क़िला पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय को मिल सका है. "सेना के लिए लाल क़िला छोड़ना कोई आसान फ़ैसला नहीं था क्योंकि वहाँ इतने साल रहने के बाद सेना ख़ुद को लाल क़िले का हिस्सा महसूस करने लगी थी.
ग़ौरतलब है कि मुग़ल शासक शाहजहाँ ने अपनी राजधानी शाहजहाँबाद में अपने निवास के रूप में लाल क़िले का निर्माण कराया था जो बाद में ब्रितानी शासकों के लिए भी सत्ता केंद्र बना. ध्यान रहे कि शाहजहाँ को ख़ूबसूरत और आलीशान इमारतें बनाने का बहुत शौक़ था और ताजमहल उन्होंने अपनी मृतक पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था. ब्रितानी सेना 1858 से ही लाल क़िले में थी और स्वतंत्रता के बाद उसने यह ज़िम्मेदारी भारतीय सेना को सौंप दी जिसने वहाँ पर एक सैनिक छावनी बना ली थी. दुनिया की धरोहर लाल क़िले की ज़िम्मेदारी मिलने के बाद जगमोहन ने कहा कि अब पूरे लाल क़िला परिसर के विकास, वहाँ माहौल ठीक करने और एक विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने के लिए विभिन्न क़दम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि यूनेस्को से भी अनुरोध किया जाएगा कि लाल क़िले को विश्व धरोहरों की सूची में शामिल कर लिया जाए. लाल क़िला सेना से लिए जाने के क़दम पर जब सेनाध्यक्ष जनरल एनसी विज से पूछा गया कि उन्हें कैसा लग रहा है तो उनका जवाब था, "देश का हित सबसे पहले आता है. मेरे ख़याल में यह एक सही फ़ैसला है." |
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