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प्रधानमंत्री की अल्फ़ा से बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने असम के अलगाववादी संगठन अल्फ़ा के बुधवार को 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सभी मुद्दों पर बातचीत का आश्वासन दिया. प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने साफ़ कर दिया कि वो संविधान के दायरे से बंधे हैं. अल्फ़ा का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार और लेखक शामिल थे. सुरक्षाबलों और अलगाववादियों के बीच हिंसा में अब तक 10 हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं. मानवाधिकार कार्यकर्ता और प्रतिनिधिमंडल के सदस्य लचित बारदोलोई ने बीबीसी को बताया,'' हमारा काम है कि सरकार को इस बात के लिए तैयार करें कि वह अल्फ़ा से शांतिवार्ता के दौरान असम की स्वायत्तता के संबंध में बातचीत पर सहमत हो जाए.'' पत्रकार अजित भूरियन का कहना था,'' संघर्ष विराम और अल्फ़ा सदस्यों को रिहा करवाना दो महत्वपूर्ण मुद्दे थे.'' असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने एएफ़पी से बातचीत में कहा,'' प्रधानमंत्री की बातचीत के दौरान उपस्थिति इस बात का साफ़ संकेत है कि भारत सरकार असम में अलगाववाद की समस्या को सुलझाने के प्रति कितनी गंभीर हैं. '' पिछले महीने सरकार के कहने पर भारतीय सेना ने अल्फ़ा अलगाववादियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान बंद कर दिया था. यह क़दम शांतिवार्ता को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें असम में हुई झड़पों में 34 की मौत18 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस उल्फ़ा के साथ बातचीत 24 अक्तूबर को05 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस असम में बंद से जनजीवन प्रभावित08 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस असम का विवादास्पद क़ानून निरस्त 12 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस असम में कई धमाके, एक की मौत14 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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