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असम में कई धमाके, एक की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में एक के बाद एक हुए छह धमाकों में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और 37 अन्य घायल हैं. घायलों में तीन पुलिसकर्मी भी हैं. पुलिस का कहना है कि उसे इस हमलों के पीछे संदिग्ध उल्फ़ा (यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम) चरमपंथियों का हाथ लगता है. उल्फ़ा के चरमपंथियों ने ही सोमवार को असम की राजधानी गुवाहाटी में एक पुलिस स्टेशन के सामने बम धमाका किया था जिसमें दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और सात अन्य घायल हो गए थे. असम पुलिस के ख़ुफ़िया अधिकारी आर चंद्रनाथन ने बीबीसी को बताया कि मंगलवार शाम को दो घंटे के अंदर पाँच जगहों पर धमाके हुए. कई धमाके उन्होंने बताया कि चरमपंथियों ने ग्रेनेड और विस्फोटकों का इस्तेमाल किया. पहला धमाका केंद्रीय असम के मोरेगाँव में एक मछली बाज़ार में हुआ जिसमें 26 लोग घायल हो गए. इसके पाँच मिनट बाद नौगाँव ज़िले में स्थित हैबरगाँव के एक बाज़ार में भी धमाका हुआ जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए. दूसरे धमाके के 20 मिनट बाद चरमपंथियों ने राजधानी गुवाहाटी में रेलवे स्टेशन पर ग्रेनेड फेंका और एक सिनेमाघर को भी अपना निशाना बनाया. इन घटनाओं में तीन लोग घायल हुए हैं. इसके बाद उत्तरी असम के चाबुआ में एक पुलिस स्टेशन पर भी ग्रेनेड से हमला किया गया लेकिन इसमें कोई हताहत नहीं हुआ. ख़ुफ़िया अधिकारी चंद्रनाथन ने कहा कि वे पक्के तौर पर कह सकते हैं कि इन घटनाओं के पीछे उल्फ़ा का हाथ है. क्योंकि कोई भी चरमपंथी गुट एक साथ इतने स्थानों पर धमाका नहीं कर सकता. उल्फ़ा केंद्र सरकार से नाराज़ है क्योंकि केंद्र सरकार ने राज्य की स्वायत्तता को लेकर किसी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है. पिछले सप्ताह उल्फ़ा की सैनिक शाखा के प्रमुख परेश बरुआ ने प्रेस में एक बयान जारी करके कहा था कि बातचीत शुरू करने की कोशिशों को झटका केंद्र सरकार के कारण लगा है. |
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