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सरकार नक्सलवादियों को लेकर चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार का मानना है कि नक्सलवादी आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और उनसे निपटने के लिए आर्थिक विकास और कड़ी पुलिस कार्रवाई ज़रूरी है. गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने देश के पुलिस महानिदेशकों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में कहा कि नक्सलवादी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. गुप्तचर ब्यूरो ने इस सम्मेलन का आयोजन किया है और इसमें देश के आला पुलिस अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं. इस सम्मेलन में देश में क़ानून व्यवस्था को लेकर आ रही चुनौतियों पर चर्चा हो रही है. गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे. गतिविधियाँ जारी गृह मंत्री शिवराज पाटिल का कहना था कि छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में अन्य नक्सलवादी समूहों की हिंसक गतिविधियाँ जारी हैं. पाटिल का कहना था कि नक्सल प्रभावित 13 राज्यों में तेज़ी से विकास किए जाने की ज़रूरत है क्योंकि नक्सलवाद आर्थिक सामाजिक,राजनीतिक और क्षेत्रीय असमानता की वजह से बढ़ता है. उन्होंने कहा कि इसके लिए ज़रूरी है कि भूमि सुधार लागू किए जाएं, जनजाति के लोगों को जंगलों के उत्पाद पर अधिकार सौंपा जाए और शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाए. गृह मंत्री का कहना था कि इन क़दमों के साथ-साथ कड़ी पुलिस कार्रवाई की जाए. उनका कहना था कि यह पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए एक चुनौती भी है. पाटिल ने नक्सलवादियों और आंध्र प्रदेश सरकार सरकार के बीच बातचीत का उल्लेख किया और कहा कि ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि अन्य नक्सलवादी गुट भी आगे आएंगे लेकिन ये उम्मीदें पूरी न उतरीं. उनका कहना था कि सीपीआई-माओवादी इस प्रक्रिया से पीछे हट गया और उसने हिंसक गतिविधियाँ शुरू कर दीं. |
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