|
केजीबी पर श्वेत पत्र की माँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि केजीबी के दस्तावेज़ों में जो कुछ कहा गया है उस पर सरकार को एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि मित्रोख़िन के दस्तावेज़ों में जो कुछ कहा गया है यदि वह सच है तो यह भारत की आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा घोटाला है. भाजपा अध्यक्ष ने इसे लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र भी लिखा है जिसमें कहा गया है कि भारत की राजनीति को प्रभावित करने के लिए कितना धन विदेशों से आया और इसके बारे में सरकार को कितनी जानकारी है यह श्वेतपत्र में जारी किया जाए. उल्लेखनीय है कि "द मित्रोख़िन आर्काइव -II : द केजीबी एंज द वर्ल्ड" नाम की किताब में कहा गया है कि भारत के कई राजनीतिज्ञों और अधिकारियों को केजीबी से ख़ुफ़िया सूचनाओं के लिए पैसे दिए जाते थे. इस ख़बर से भारत के राजनीतिक हलकों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. गंभीरता की ज़रुरत हालांकि भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने विशेष रुप से बुलाई गई पत्रकारवार्ता में कहा कि इस विषय को जितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए उतनी गंभीरता से इसे लिया नहीं जा रहा है. उन्होंने कहा, "इस दस्तावेज़ में कहा गया है कि लोगों ने और राजनीतिक दलों ने पैसा लिया, लेकिन सवाल इसका नहीं है, सवाल इस बात का है कि जिस भाषा का उपयोग किया गया है उससे देश की छवि धूमिल हुई है, देश बदनाम हुआ है." आडवाणी ने कहा कि कागज़ात में आरोप लगाए गए हैं कि 21 ग़ैरकम्युनिस्ट नेताओं, जिसमें चार पूर्व मंत्री भी थे, को चुनाव लड़ने के लिए पैसा दिया गया. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत अपने लोकतंत्र पर गर्व करता है लेकिन यह पता लगाना चाहिए कि इस प्रजातंत्र को प्रभावित करने के लिए केजीबी, सीआईए और आईएसआई जैसी संस्थाओं से कितना पैसा आया. एक सवाल के जवाब में कहा कि वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस मामले की जाँच करने के लिए इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उस काल से उनका कोई संबंध नहीं है और वे निष्पक्षता से इस मामले को देख सकेंगे. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||