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बगलिहार के लिए विशेषज्ञ जम्मू पहुँचे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू-कश्मीर के डोडा ज़िले में चनाब नदी पर बन रहे बगलिहार बाँध परियोजना के लिए विश्व बैंक द्वारा नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ अपनी तीनदिवसीय दौरे पर जम्मू पहुँच गए हैं. विश्व बैंक ने स्विस प्रोफेसर रेमंड लेफ़ित को नियुक्त किया है और वो इस मामले में भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करेंगे. विश्व बैंक ने यह फ़ैसला भारत और पाकिस्तान से बातचीत के बाद किया. जम्मू पहुँचने पर विश्व बैंक विशेषज्ञ रेमंड लेफ़ित को पत्रकारों ने घेरने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कहा,'' हम परियोजना स्थल पर जाएँगे और भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों से बातचीत करेंगे.'' बीबीसी संवाददाता के अनुसार जम्मू प्रशासन ने प्रोफेसर रेमंड लेफ़ित की यात्रा पर प्रसन्नता व्यक्त की है और उम्मीद जताई है कि यह मामला हमेशा के लिए सुलझ जाएगा. प्रोफेसर लेफ़ित सिविल इंजीनियर हैं और स्विस फेडरल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर हैं. सन् 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल नदी समझौते पर हस्ताक्षर करनेवालों विश्व बैंक भी शामिल है. विश्व बैंक की भूमिका पाकिस्तान ने इस वर्ष जनवरी महीने में विश्व बैंक से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे. इसके पहले भी भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि पर सहमति बनाने के लिए विश्व बैंक ने ही मध्यस्थता की थी. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की हाल की भारत यात्रा के दौरान भी बगलिहार बाँध पर विस्तार से चर्चा हुई थी. पाकिस्तान बगलिहार बाँध पर कड़ी आपत्ति करता रहा है और उसका कहना है कि यह सिंधु जल संधि का उल्लंघन है. पाकिस्तान ने आशंका व्यक्त की है कि इस बाँध के बनने से उसे मिलने वाला चनाब नदी का पानी कम हो जाएगा. भारत ने इन आशंकाओं का खंडन करते हुए कहा है कि वह सिंधु जल संधि का पूरी तरह पालन करते हुए ही बाँध बना रहा है. |
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