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विश्व बैंक ने तटस्थ जाँच की बात की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू-कश्मीर के डोडा ज़िले में चनाब नदी पर बन रहे बगलिहार बाँध परियोजना के बारे में विश्व बैंक ने भारत और पाकिस्तान से कहा है कि वे एक तटस्थ विशेषज्ञ को मुआयना करने दें. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने दिल्ली में पत्रकारों को इसकी जानकारी दी है. प्रवक्ता ने बताया कि विश्व बैंक ने इसके लिए तीन नाम भी सुझाए हैं लेकिन उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि क्या भारत इसके लिए तैयार है. भारत सरकार ने इस मामले पर अभी तक अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि तटस्थ विशेषज्ञ की जाँच पर उसे विशेष आपत्ति नहीं है. पाकिस्तान ने इस वर्ष जनवरी महीने में विश्व बैंक से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे.
विश्व बैंक से हस्तक्षेप माँग करने की वजह ये है कि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि पर सहमति बनाने के लिए विश्व बैंक ने ही मध्यस्थता की थी. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की हाल की भारत यात्रा के दौरान भी बगलिहार बाँध पर विस्तार से चर्चा हुई थी. पाकिस्तान बगलिहार बाँध पर कड़ी आपत्ति करता रहा है और उसका कहना है कि यह सिंधु जल संधि का उल्लंघन है. पाकिस्तान ने आशंका व्यक्त की है कि इस बाँध के बनने से उसे मिलने वाला चनाब नदी का पानी कम हो जाएगा. भारत ने इन आशंकाओं का खंडन करते हुए कहा है कि वह सिंधु जल संधि का पूरी तरह पालन करते हुए ही बाँध बना रहा है. |
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