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गुरुवार, 22 सितंबर, 2005 को 20:19 GMT तक के समाचार
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लाहौर हाईकोर्ट में गधे का मामला
गधा
पाकिस्तान में पशुओं पर निर्दयता पर रोक के लिए क़ानून बने हुए हैं
पाकिस्तान के लाहौर हाईकोर्ट में पिछले दिनों एक अजीबोगरीब मामला सामने आया जिसके केंद्र में था एक गधा.

गधे के मालिक और उसके पड़ोसी के बीच गधे के इलाज को लेकर झंझट हो गया.

मामला अदालत तक गया और निचली अदालत ने मालिक निगाह हुसैन को अपने गधे को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया ताकि उसके इस आरोप की सच्चाई पता लग सके कि उसके पड़ोसी ने गधे की पिटाई की है.

निगाह हुसैन ने गधे को अदालत में लाने से ये कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके गधे को आराम चाहिए.

आख़िरकार निगाह हुसैन गधे को अदालत में लाने के लिए तैयार हो गए लेकिन शर्त ये रख दी कि गधे की गवाही लेनी होगी.

इसपर न्यायाधीश ने कह दिया कि अब और सुनवाई नहीं होगी क्योंकि मामला गंभीर नहीं है.

लेकिन अब लाहौर हाईकोर्ट ने कहा है कि वह मामले की सुनवाई करेगा.

पारिवारिक गधा

ये मामला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक छोटे से शहर नूरपुर थाल का है.

निगाह हुसैन का कहना है कि उन्होंने गधे को 6,000 रूपए में ख़रीदा था और उनका पूरा परिवार उसे प्यार करता है.

हुसैन के कहा कि उनके पड़ोसी मोहम्मद रमज़ान ने गधे की पिटाई की है.

निगाह हुसैन अपने गधे को एक पशु चिकित्सक के पास ले गए जिसने ये सर्टिफ़िकेट दे दिया कि गधे के शरीर पर पिटाई के निशान हैं.

इसके बाद पशुओं पर निर्दयता के ख़िलाफ़ क़ानून के आधार पर मोहम्मद रमज़ान को गिरफ़्तार कर लिया गया.

सुनवाई

फिर सुनवाई हुई जहाँ न्यायाधीश ने शिकायत की अर्ज़ी में कुछ ख़ामियाँ निकालीं और गधे को अदालत में लाने का निर्दश दिया.

बताया जा रहा है कि न्यायाधीश की बातों से निगाह हुसैन काफ़ी परेशान हो गए और कह दिया कि गधा तभी आएगा जब उसे गवाही देने दी जाएगी.

इससे खीझकर न्यायाधीश ने मुक़दमा ख़ारिज़ कर दिया और मोहम्मद रमज़ान को रिहा कर दिया गया.

लेकिन निगाह हुसैन इस बात पर अड़े रहे कि न्यायाधीश ने उनके पक्ष को ग़लत पढ़ा.

इसके बाद उन्होंने लाहौर हाईकोर्ट में निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर कर दी है.

साथ ही उन्होंने ये भी कह दिया है कि जबतक उनके गधे को न्याय नहीं मिलता वे उसे काम पर नहीं लगाएँगे.

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