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भारत सहस्राब्दी लक्ष्यों से बहुत दूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने स्वीकार किया है कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा तय विकास के सहस्राब्दी लक्ष्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य जयराम रमेश ने बीबीसी हिंदी सेवा के कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए यह बात स्वीकार की. पाँच साल पूर्व संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय विकास लक्ष्यों के बारे में रमेश ने कहा, "हम सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों को पूरा नहीं कर सकेंगे, यह बात स्पष्ट है." उन्होंने कहा, "भारत स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में उतनी प्रगति नहीं कर पाया है जितना कि आर्थिक विकास हुआ है. इन क्षेत्रों में पर्याप्त सार्वजनिक निवेश नहीं किया गया है." रमेश ने कहा कि किसी देश के विकास की स्थिति का निर्धारण करने वाले शिशु मृत्यु दर की ही बात करें तो बांग्लादेश तक भारत से आगे निकल चुका है. उन्होंने कहा कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा चुकी हैं. जयराम रमेश ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण ही उदारीकरण नहीं है. उन्होंने कहा , "उदारीकरण और भूमंडलीकरण के फ़ायदे आम लोगों तक तभी पहुँचेंगे जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में भी सुधार हो." |
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