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बंगारू ने बजाया बिगुल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शुरुआत से ठीक पहले पार्टी के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण ने लालकृष्ण आडवाणी पर हमला बोल दिया है. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आडवाणी नेताओं की एक चौकड़ी से घिर गए हैं लेकिन यह भी कहा है कि उन्होंने आडवाणी के इस्तीफ़े की माँग नहीं की है. बंगारू लक्ष्मण ने संगठन के पुनर्गठन की भी माँग की और कहा पार्टी को इस स्थिति से छुटकारा पाना होगा. बंगारू लक्ष्मण आडवाणी विरोधी मुहिम के प्रमुख स्वरों में से एक माने जाते हैं हालांकि तहलका कांड के बाद उनको पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा था. बंगारू के अलावा भाजपा के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष जना कृष्णमूर्ति और उपाध्यक्ष रह चुके प्यारेलाल खंडेलवाल जैसे नेता पहले ही आडवाणी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा चुके हैं. मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा जैसे नेता भी आडवाणी के अध्यक्ष बने रहने के विरुद्ध मुखर रहे हैं. इधर मुरली मनोहर जोशी के पार्टी कार्यकारिणी से ठीक पहले नागपुर में संघ नेताओं से मुलाक़ात करने से आडवाणी विरोधी मुहिम को हवा मिली है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख केएस सुदर्शन के भाजपा कार्यकारिणी के पहले दिन चेन्नई में मौजूद होने ने ऐसी ख़बरों को और हवा दी है. दरार ऐसी सूचनाएँ पहले से ही थीं कि कार्यकारिणी में आडवाणी समर्थकों और विरोधियों के बीच ज़ोर आज़माइश की तैयारी चल रही है.
अटल बिहारी वाजपेयी ने कार्यकारिणी की बैठक में देर से आकर पहले ही कार्यकारिणी के कार्यक्रम को गड़बड़ा दिया है. हालांकि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वैंकया नायडू का कहना था कि कार्यकारिणी में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की नाकामयाबियों को उजागर किया जाएगा लेकिन कार्यकारिणी में सबकी नज़र पार्टी की आंतरिक कलह पर है. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तीन प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद है. ये देश की राजनीतिक, आर्थिक और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति पर होंगे. आडवाणी पर दबाव इसके पहले भी आपसी खींचतान की वजह से राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक टाल दी गई थी. माना जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी पर आरएसएस की ओर से पद छोड़ने का दबाव है. उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान लालकृष्ण आडवाणी ने मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कहा था और इसके बाद पार्टी के भीतर और संघ परिवार में व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी. इसके कारण आडवाणी ने एक बार इस्तीफ़ा भी दे दिया था लेकिन नाटकीय घटनाक्रम के बाद वे इसे वापस लेने को भी राज़ी हो गए थे. लेकिन सूरत में आरएसएस के प्रांत प्रचारकों की बैठक के बाद एक बार फिर आडवाणी को भाजपा अध्यक्ष के पद से हटाने की माँग उठने लगी थी. इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने मामले में हस्तक्षेप किया था और इसके बाद ख़बरें आईं कि आरएसएस की ओर से मोहलत दी गई है कि आडवाणी अपने इस्तीफ़े का समय ख़ुद ही तय करे. लेकिन पिछले दिनों मदनलाल खुराना के निष्कासन और वापसी के प्रकरण ने वाजपेयी और आडवाणी के रिश्तों को ही तल्ख़ कर दिया है. |
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