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उल्फ़ा ने बातचीत की पेशकश की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राज्य असम में सक्रिय अलगाववादी संगठन उल्फ़ा ने केंद्र सरकार से बातचीत के लिए एक ठोस प्रस्ताव दिया है. उल्फ़ा ने पहली बार ऐसी पेशकश की है. उल्लेखनीय है कि उल्फ़ा ने पिछले दिसंबर में बातचीत के भारत सरकार के एक प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. उसका कहना था कि बातचीत से पहले कोई भी शर्त उसे स्वीकार्य नहीं है. सरकार चाहती थी कि बातचीत में शामिल होने से पहले उल्फ़ा हिंसा छोड़ने की घोषणा करे. अब जबकि उल्फ़ा ने स्वयं पेशकश की है तो भारत सरकार ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए अक्तूबर के पहले सप्ताह में वार्ता आयोजित करने में दिलचस्पी दिखाई है. उल्फ़ा प्रमुख परेश बरुआ ने भारत सरकार से बातचीत के लिए एक आठ-सदस्यीय दल भेजने का फ़ैसला किया है. यह जानकारी असमी साहित्यकार इंदिरा गोस्वामी ने दी, जो कि सरकार और उल्फ़ा के बीच मध्यस्थ का भी काम करती हैं. उनके अनुसार बरूआ ने कहा कि उल्फ़ा का शिष्टमंडल आगे की शांति वार्ताओं के तौर-तरीक़े पर सहमति बनाने का प्रयास करेगा. उल्फ़ा के शिष्टमंडल में लेखक, पत्रकार और अन्य पेशेवर लोग शामिल होंगे. |
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