|
अमरीकी चरमपंथी सूची में उल्फ़ा शामिल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों की नई सूची जारी की है जिसमें असम में सक्रिय अलगाववादी संगठन उल्फ़ा को शामिल किया गया है. इसके अलावा अमरीका ने नक्लसवादी संगठन सीपीआई-माओवादी और लश्कर-ए-तैबा और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों को शामिल किया है. उल्फ़ा और सीपीआई-माओवादी को अन्य चरमपंथी संगठनों की सूची में रखा गया है. ये वे संगठन हैं जो अमरीकी हितों और नागरिकों पर सीधे हमला नहीं करते. युनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम, उल्फ़ा के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भारत के पूर्वोत्तर हिस्से का सबसे प्रमुख चरमपंथी गुट है. यह संगठन पूर्वोत्तर के अन्य गुटों से हथियारों की ख़रीद-फरोख्त करता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संगठन के अन्य पड़ोसी राज्यों के अलगाववादी संगठनों से संबंध हो सकते हैं और इसे अज्ञात बाहरी स्रोतों से आर्थिक मदद मिलती है. प्रेक्षकों का कहना है कि अमरीकी सूची ऐसे समय आई है जब भारत सरकार उल्फ़ा के साथ बातचीत करने की योजना बना रही है. माना जा रहा है कि इससे केंद्र सरकार को उल्फ़ा पर दबाव बनाने में मदद मिलेगी. लश्कर का नाम लेकिन लश्कर-ए-तैबा विदेश चरमपंथी संगठनों की दूसरी श्रेणी में है जिसकी संपत्ति ज़ब्त की जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि लश्कर ने विभिन्न नामों और संगठनों के ज़रिए अपनी गतिविधियाँ बढ़ाई हैं और उन सभी को प्रतिबंधित सूची में रखा गया है. भारतीय सुरक्षाबलों का कहना है कि लश्कर और अन्य चरमपंथी संगठन 'सेव कश्मीर' नाम से अपनी गतिविधियाँ चला रहे हैं. अमरीका ने आतंकवाद पर जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत इस लड़ाई में महत्वपूर्ण सहयोगी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को जम्मू-कश्मीर,पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सलवादी प्रभावित हिस्से में चरमपंथी हमलों का सामना करना पड़ा है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||