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बूटा के विरोध में वामपंथियों का बंद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राज्यपाल बूटा सिंह को हटाने की मांग को लेकर वामपंथी दलों ने बिहार में एक दिन के बंद का आह्वान किया है. इसके लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं. इस बंद का आह्वान पाँच वामपंथी दलों ने किया है और उनकी कई माँगों में प्रमुख है राज्यपाल बूटा सिंह की वापसी और उनके सलाहकार को अरुण पाठक को हटाना. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), सीपीआई एमएल (लिबरेशन), फ़ॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ़ इंडिया (एसयूसीआई) ने अपने इस बंद से बिजली और पानी आपूर्ति जैसी सेवाओं को बंद से अलग रखा है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने भी बंद का आव्हान किया है लेकिन बूटा सिंह को वापस बुलाने और अरुण पाठक को हटाने की माँग सीपीएम नहीं कर रही है. आरोप वामपंथी दल कई गंभीर आरोप लगा रहे हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार वामपंथी दल काम के बदले अनाज और अन्य जन कल्याण की योजना में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. इसके अलावा वे विवादास्पद आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की गिरफ़्तारी, कई करोड़ के बाढ़ राहत घोटाले की सीबीआई जाँच शामिल है. अधिकारियों का कहना है कि बंद के आह्नान को देखते हुए राज्यभर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं. आरंभिक सूचनाओं के अनुसार राज्य में बंद का मिलाजुला असर दिखाई पड़ रहा है. समाचार एजेंसिंयों के अनुसार कई निजी स्कूल बंद हैं लेकिन सरकारी स्कूल खुले हुए हैं. |
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