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लालू के बयान पर संसद में हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह को लेकर लालू प्रसाद यादव के कथित बयान पर संसद के दोनों सदनों में हंगामा हुआ है और दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही शुरु होते ही प्रश्नकाल स्थगित करके इस विषय पर चर्चा करने की माँग की. विपक्षी दलों ने बिहार के राज्यपाल बूटासिंह द्वारा रेलवे मंत्री लालू प्रसाद यादव को कथित रुप से एक अधिकारी की पदस्थापना को लेकर लिखे गए पत्र को लेकर कामरोको प्रस्ताव सोमवार से दे रखा था. मंगलवार को वे लालू प्रसाद यादव की एक टेलीविज़न चैनल पर की गई एक टिप्पणी पर चर्चा की माँग कर रहे थे जिसमें उन्हें कथित रुप से कहा था कि बूटा सिंह को उन्होंने राज्यपाल के रुप में मनोनीत किया था. लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने विपक्ष की इस माँग को मानने से इंकार कर दिया कि प्रश्नकाल स्थगित किया जाए. उनका कहना था कि उन्हें जो नोटिस दिया गया है उसमें प्रश्नकाल स्थगित करने का ज़िक्र नहीं है. सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि कामरोको प्रस्ताव पर वे प्रश्नकाल के बाद अपना निर्णय देंगे लेकिन विपक्ष नहीं माना और सत्तारुढ़ गठबंधन के सदस्यों के साथ नोंकझोंक चलती रही. बाद में संसदीय कार्यमंत्री की सहमति से सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक इस शर्त के साथ स्थगित की गई कि तब रोज़गार गारंटी योजना विधेयक पर सरकार के जवाब के बाद मतदान होगा. राज्यसभा इसी तरह राज्यसभा में विपक्ष ने लालू प्रसाद यादव के कथित बयान पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया. हालांकि राज्यसभा के सभापति भैरोसिंह शेखावत ने इसकी अनुमति नहीं दी लेकिन एनडीए के सदस्य नारेबाज़ी करते रहे. सभापति कुछ देर तो कार्यवाही शोरशराबे के बीच चलाते रहे लेकिन कोई आधे घंटे बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. इसके बाद सदन की कार्यवाही शुरु हुई तो उपसभापति ने यह मामला सदन में उठाने की अनुमति दे दी. भाजपा के रविशंकर प्रसाद ने यह मामला उठाया लेकिन उपसभापति ने कहा कि नियमानुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल आदि के ख़िलाफ़ जब तक कोई प्रस्ताव न लाया जाए उनके बारे में चर्चा नहीं की जा सकती. विपक्ष और सत्तापक्ष की नोंकझोंक के बीच चर्चा चलती रही जिसका आख़िर में गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने जवाब दिया. पाटिल ने कहा कि राज्यपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया से सदन वाकिफ़ है और इस पर चर्चा की ज़रुरत नहीं है. |
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