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तबादलों को लेकर बूटा सिंह विवाद में घिरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं. बूटा सिंह ने रेल मंत्री लालू यादव को एक कथित सिफ़ारिशी पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने रेलवे के दो वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला करने को कहा था. एनडीए नेता नेता पहले से ही राज्यपाल पर निशाना साध रहे हैं और इस पत्र ने उन्हें एक और हथियार दे दिया है. एनडीए नेताओं ने राज्यपाल को वापस बुलाने की माँग की है. बिहार भाजपा अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी ने राज्यपाल बूटा सिंह पर आरोप लगाया कि वो लालू यादव से मिले हुए हैं. उनका आरोप था कि बूटा सिंह लालू के इशारे पर राज्य का प्रशासन चला रहे हैं. लेकिन रेल मंत्री लालू यादव ने इस विवाद को थामने की कोशिश की. राज्यपाल बूटा सिंह से दिल्ली में मुलाक़ात के बाद लालू यादव ने पत्रकारों से कहा, '' यदि वो मुझको पत्र लिखते हैं तो इसमें बड़ी बात क्या है. जिस अधिकारी पर सवाल उठाए गए हैं, वो अब भी वहीं है.'' लालू यादव ने कहा कि राज्यपाल को जानकारी दे दी गई थी कि उस अधिकारी के ख़िलाफ़ सतर्कता विभाग की जाँच चल रही है और राज्यपाल इस बात से सहमत थे कि ऐसे में तबादला न किया जाए. लालू का जवाब लालू यादव ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी मुलाक़ात की. जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि मुलाक़ात के दौरान किस विषय पर चर्चा हुई तो उनका कहना था कि मुलाक़ात रोज़गार गारंटी विधेयक के संबंध में हुई थी. इसके पहले बिहार के 17 आईपीएस अधिकारियों के तबादले को लेकर राज्यपाल बूटा सिंह और बिहार के मुख्य सचिव जीएस कंग के बीच विवाद खड़ा हो गया था. इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब राज्यपाल के कार्यालय से 17 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी हुआ. इस आदेश के बाद मुख्य सचिव जीएस कंग यह कह कर अवकाश पर चले गए थे कि उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया. उल्लेखनीय है कि 29 जुलाई को आरजेडी के विवादित सांसद शहाबुद्दीन पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अधीक्षक सहित 17 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया था. |
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