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मणिपुर में आपूर्ति सेना की मदद से | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के लिए आवश्यक सामग्री की आपूर्ति सेना के विमानों के ज़रिए शुरू कर दी है. मणिपुर तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिछले लगभग पंद्रह दिनों से जारी नाकाबंदी के कारण सरकार को यह क़दम उठाना पड़ा है. कई नगा गुटों ने ग्रेटर नगालैंड के गठन की माँग को लेकर मुख्य मार्ग को अवरूद्ध कर दिया है. नगा गुटों की माँग है कि मणिपुर के उन चार ज़िलों को ग्रेटर नगालैंड में शामिल किया जाए जहाँ नगा बहुसंख्यक हैं जबकि मणिपुर के लोग इस माँग का जमकर विरोध कर रहे हैं. पुलिस ने बलपूर्वक नाकाबंदी समाप्त करने की कोशिश की लेकिन हिंसा भड़कने के कारण यह कोशिश नाकाम रही, नगा कार्यकर्ताओं ने मणिपुर के कई सरकारी दफ़्तरों में आग लगा दी. भारतीय सेना के चार मालवाहक विमान ज़रूरी सामान के साथ मणिपुर की राजधानी इंफाल पहुँचे हैं. सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि इन विमानों में जीवन रक्षक दवाओं के अलावा, आम ज़रूरत की चीज़ें भी भेजी गई हैं क्योंकि राज्य में खाद्य सामग्री की कमी होने लगी है. मणिपुर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राहत सामग्री को इंफ़ाल तक पहुँचाने का ख़र्च भारत का गृह मंत्रालय उठा रहा है. इस बीच मणिपुर सरकार उस पुल को दुरूस्त करने के काम में लगी है जो राज्य को असम से जोड़ती है, इस पुल के चालू होने के बाद भारी ट्रक राज्य में पहुँच सकेंगे. यह रास्ता नगा आबादी वाले इलाक़े से बाहर है इसलिए राज्य सरकार को आशा है कि वहाँ कोई समस्या नहीं होगी. नगा संगठनों ने उस पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह अवरोध खड़े कर दिए हैं जो नगालैंड से होते हुए मणिपुर तक जाता है. धमकी प्रमुख नगा संगठन एनएससीएन ने धमकी दी है कि अगर उनकी यह माँग नहीं मानी गई तो वह भारत सरकार के साथ चल रही वार्ताओं से अलग हो जाएगा. लेकिन भारत सरकार का कहना है कि मणिपुर के सभी राजनीतिक दल इस माँग के ख़िलाफ़ हैं और पिछले कुछ वर्षों में इस मामले को लेकर मणिपुर में काफ़ी हिंसक प्रदर्शन हुए हैं. एनएससीएन और भारत सरकार के बीच इस समय संघर्ष विराम लागू है लेकिन मौजूदा हालत को देखते हुए उसके ख़तरे में पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है. |
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