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कर्नाटक में राजनीतिक उथलपुथल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कर्नाटक में एक बार फिर राजनीतिक उथलपुथल शुरु हो गई है. इस बार चर्चा चल रही है कि भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) में कोई समझौता होने जा रहा है. भाजपा ने कहा है कि उसे इस समझौते से कोई परहेज़ नहीं है और जेडीएस ने न तो इस तरह के समझौते का कोई खंडन किया है और न इसकी पुष्टि की है. इस समय कांग्रेस और जेडीएस मिलकर साझा सरकार चला रहे हैं और भाजपा प्रमुख विपक्षी दल है. पिछले हफ़्ते ही जेडीएस ने विधायक दल का नेता बदलते हुए विद्रोही नेता सिद्धारमैया की जगह एमपी प्रकाश को नेता चुन लिया था. भाजपा की बैठक हालांकि कर्नाटक विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ा विधायक दल है लेकिन राजनीतिक समझौता न हो पाने की वजह से उसे विपक्ष में बैठना पड़ा था.
बीबीसी के दक्षिण भारत संवाददाता सुनील रमन ने बंगलौर से ख़बर दी है कि भाजपा विधायक दल की रविवार शाम एक बैठक हो रही है. बैठक में इस विषय पर भी चर्चा हो सकती है. इस बीच जेडीएस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी ने भाजपा विधायक दल के नेता येदुरप्पा से मुलाक़ात की है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि भाजपा में वरिष्ठ नेता अनंत कुमार और येदुरप्पा के बीच जो खींचतान चल रही है उसके चलते भी यह राजनीतिक सरगर्मी दिखाई दे रही हो. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसकी वजह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा और जेडीएस नेता देवेगौड़ा के बीच राजनीतिक मनमुटाव भी हो सकती है. हालांकि उनका मानना है कि इस समय कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को कोई ख़तरा नहीं है. |
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