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मध्य प्रदेश के नवयुवक का कमाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का विकास अमरीका के सिलिकन वैली से निकलकर अब मध्यप्रदेश के गाँवों में पहुँच गया है. बेहतरीन गेहूँ और भुखमरी के लिए जाने जानेवाले विदिशा ज़िले के गंजबासौदा में एक युवक ने विश्व का पहला हिंदी इंटरनेट एक्सप्लोरर तैयार कर दिखाया है. भंवरा ग्राम के किसान परिवार में जन्मे जगदीप डाँगी का यह प्रयास था कि अंग्रेजी भाषा में अपने अल्पज्ञान से किसी तरह पार पाया जाए. लेकिन चार सालों की उनकी अनथक मेहनत अब हिंदी इंटरनेट एक्सप्लोरर, ग्लोबल वर्ड ट्राँसलेटर और हिंदी शब्दकोष जैसे सॉफ्टवेयर के रूप में तैयार है. जो करोड़ों हिंदी भाषियों के लिए एक नई कंप्यूटर क्राँति की शुरुआत कर सकता है. इस हिंदी इंटरनेट एक्सप्लोरर में वे सारी सुविधाएं हैं जो माइक्रोसॉफ्ट एक्सप्लोरर में मौजूद होती है.जैसे मेन्यू और कमांड्स इत्यादि. हिंदी भाषियों की सुविधा के लिए यह सभी देवनागरी लिपि में दिखाए गए हैं. इसके साथ ही मौज़ूद है इसमें “क्लिक टू हिंदी” की आसानी जिसके तहत कोई भी वेब पेज पढ़ते समय किसी भी शब्द पर क्लिक कर उस शब्द का हिंदी अर्थ, उच्चारण और पर्यायवाची शब्द साथ-साथ देखे जा सकते हैं. लगभग उसी प्रक्रिया की तरह जो डिक्शनरी डॉट कॉम में देखने में आती है. उनके द्वारा तैयार किए गए इस शब्दकोष में फिलहाल 35 हज़ार अंग्रेजी शब्दों के हिंदी में मायने पर्यायवाची शब्दों के साथ मौजूद हैं. इस्तेमाल करनेवाले अपनी सुविधानुसार इसमें नए शब्द को भी जोड़ सकता है. काम अधूरा लेकिन जगदीप डाँगी अपना काम आज भी अधूरा मानते हैं. उनका पूरे पेज का हिंदी अनुवाद कर पाने वाले सॉफ्टवेयर का काम अभी अधूरा है.
उनका कहना है कि उन्होंने इसके लिए कोड्स तो विकसित कर लिए हैं लेकिन तमाम मेहनत के बावजूद अंग्रेज़ी व्याकरण पर उनकी कमज़ोर पकड़ के कारण यह काम थोड़ा धीरे चल रहा है. मगर जगदीप का सारा ध्यान इंटरनेट और उससे जुड़ी सुविधाओं के विकास पर ही क्यों केंद्रित है? वो कहते हैं कि कंप्यूटर का प्रयोग करने वालों में से ज़्यादातर लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और वह इंटरनेट एक्सप्लोरर या ब्राउज़र के सहारे ही संभव है. साथ ही आज बहुत सारी आवश्यक सूचनाएं, परीक्षाओं के परिणाम, समाचार, ट्रेनों-बसों की समय सारणी और किसानों के ज़रूरत की सूचनाएँ इंटरनेट के सहारे प्राप्त की जा सकती हैं. हिंदी भाषियों के लिए कंप्यूटर प्रयोग को सहज बनाने का यह भाव शायद इस 28 वर्षीय युवक के अपने तजुर्बे का नतीजा है. हिंदी भाषा में स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाले जगदीप डाँगी ने जब कंप्यूटर इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिला लिया तो अंग्रेज़ी का लगभग न जानना उनकी सबसे बड़ी दिक़्क़त बनी. कोर्स की तमाम पुस्तकों के अंग्रेज़ी में होने के अलावा उनके लिए इंटरनेट का प्रयोग भी मुश्कलों भरा था. वो कहते हैं, '' तभी मैंने सोचा था कि मैं कंप्यूटर का ज्ञान हासिल कर ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करूंगा जो हिंदीभाषियों की इन दिक्कतों का समाधान कर सके.'' जगदीप डाँगी का कंप्यूटर क्षेत्र में प्रवेश भी जरूरतों पर आधारित था. एक पैर में तकलीफ़ जिसके इलाज की गड़बड़ी ने उनकी एक आँख पर भी हल्का असर डाला. इन सब बाधाओं को परास्त कर जगदीप डाँगी ने सिर्फ़ अपने बलबूते और परिवार के प्रेम और आर्थिक सहयोग के सहारे कंप्यूटर क्षेत्र में एक क्राँतिकारी काम कर दिखाया है. उनकी इच्छा है कि अब इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को पहुँचे. इसके लिए उन्होंने शासन से भी मदद माँगी लेकिन अबतक उनकी अनसुनी हुई है. |
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