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दूसरों की क़िस्मत पढ़ो, अपनी चमकाओ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दूसरों का भाग्य बाँचकर अपनी क़िस्मत चमकाने का शायद एक नायाब नुस्ख़ा नई पीढ़ी के हाथ लग गया है. बाक़ायदा कोर्स करके ऐसे लोग पेशेवर ज्योतिषी बनने के लिए आगे आ रहे हैं जिन्हें पंडित जी या शास्त्री जी कहना ज़रा कठिन महसूस होता है. पीढ़ी दर पीढ़ी, गुरू-शिष्य परंपरा से चलने वाले इस पारंपरिक अध्ययन का रूप तेज़ी से बदल रहा है, कंप्यूटरों ने पोथी-पत्रे की जगह ले ली है और चुटिया वाले पंडित जी की जगह जींस पहनकर अँगरेज़ी बोलने वाले नौजवान आ गए हैं. भारत में लगभग पचीस विश्वविद्यालय विधिवित पढ़ाई के बाद ज्योतिष की डिग्री देते हैं जहाँ इन दिनों दाख़िला लेने वालों की भारी भीड़ दिखने लगी है. दिल्ली के भारतीय विद्या भवन में ज्योतिष शास्त्र के प्राध्यापक एस गणेश का मानना है कि "जब लोग खाना पकाने और घर की साज- सज्जा जैसे विषयों को पढ़कर उसे व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं तो ज्योतिष को क्यों नहीं ?" रोज़गार कुछ वर्ष पहले तक शौक के कारण ज्योतिष पढ़ने वालों की बजाए अब इसे व्यवसायिक दृष्टिकोण से पढ़ा जा रहा है, महिलाएँ भी इस विषय को अपनाने में पीछे नहीं हैं. ज्योतिष पर लगातार बढ़ रहे विश्वास के बारे में एक प्रसिद्ध ज्योतिषी की पुत्री इला शुक्ला का कहना है कि "जीवन अब उतना सरल नहीं रहा जितना पहले था. तनाव और प्रतियोगिता के इस ज़माने में ज्योतिष जीवन को कुछ हद तक आसान बनाने में मददगार है इसलिए इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है."
ज्योतिषशास्त्र की एक विद्यार्थी शीला पारखी का कहना है कि "ये एक सम्मानजनक व्यवसाय है, जिसमें काफी पैसा है, साथ ही इसे घर बैठे भी किया जा सकता है, महिलाओं के लिए यह विषय आदर्श अवसर उपलब्ध करवाता है." कुछ साल पहले तक भारतीय विद्या भवन में ज्योतिष पढ़ने वालों की संख्या 50 से 100 तक रहती थी लेकिन इस वर्ष बढ़कर 800 तक जा पहुँची है. इस विषय को पढ़ने वालों की तादात बढ़ने का कारण बताते हुए एस गणेश कहते हैं "पहले एक जाति विशेष के लोग ही इसका अध्ययन किया करते थे लेकिन अब ज्योतिष के दरवाज़े सभी के लिए खुल गए हैं." लेकिन ऐसे लोग हैं भी हैं जिनका मानना है कि सबके लिए दरवाज़ा खुलने का मतलब यह नहीं है कि सभी अच्छे ज्योतिषी बन जाएँगे. दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के सामने हाथ देखकर भविष्य बताने वाले अजय झा का कहना है कि इस पेशे में नब्बे प्रतिशत अनुभव और साधना जरूरी है. भगवान से सीधे तार जुड़े होने का दावा करते हुए कहते हैं "अगर ज्योतिष का ज्ञान पढ़कर ही आ जाए तो सभी ज्योतिषी न बन जाएँ. ज्योतिष में आत्मा की आवाज़ का बड़ा रोल है और वो साधना से ही संभव है." वैसे तो अब भविष्यवाणी के लिए कम्प्यूटर का भी सहारा लिया जाने लगा है लेकिन इस विषय के जानकारों का मानना है कि कहीं भी थोड़ी सी चूक ग़लत भविष्यफल दे सकती है. ज्योतिषियों की भविष्यवाणियाँ सही हों या ग़लत, लेकिन एक भविष्यवाणी बेखटके की जा सकती है कि आने वाले समय में ज्योतिष और ज्योतिषियों का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा. |
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