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महंत असम गण परिषद से निकाले गए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर राज्य असम के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ प्रफ़ुल्ल कुमार महंत को उनकी पार्टी असम गण परिषद से निष्कासित कर दिया गया है. 1980 के दशक में असम में कथित विदेशियों के ख़िलाफ़ आंदोलन के बाद प्रफ़ुल्ल कुमार महंत ने ही असम गण परिषद (एजीपी) का गठन किया था. और फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. भारत सरकार के साथ एक समझौते के बाद 1985 में यह आंदोलन ख़त्म हुआ था. प्रफ़ुल्ल कुमार महंत ने कहा है कि वे ठहरकर कोई निर्णय लेंगे. पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में 'पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण' प्रफ़ुल्ल कुमार महंत को निष्कासित करने का निर्णय लिया गया. इस निर्णय की घोषणा करते हुए एजीपी के अध्यक्ष बृंदाबन गोस्वामी ने पत्रकारों को बताया कि महंत ने हमेशा अपना व्यक्तिगत एजेंडे पर काम किया और और हमेशा उन्हीं लोगों को आगे बढ़ाया जो उनको प्रिय थे. उनका आरोप था कि उन्होंने पिछले कई चुनावों में पार्टी के वर्तमान नेतृत्व को बदनाम करने के लिए पार्टी के कई उम्मीदवारों को हरवा दिया. बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार विशेषज्ञों का कहना है कि महंत के सामने अब दो ही विकल्प हैं, एक तो यह कि वे राज्य में अपने समर्थकों के साथ एक नई पार्टी का गठन करें या फिर वे भाजपा जैसी कोई राष्ट्रीय पार्टी में शामिल हो जाएँ, जिसके साथ मिलकर एजीपी ने पिछला चुनाव लड़ा था. |
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