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गुरुवार, 20 नवंबर, 2003 को 02:22 GMT तक के समाचार
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हमलों के पीछे चरमपंथीः तरूण गोगोई
बुधवार को धुबरी ज़िले में मारे गए लोग
विभिन्न हिस्सों में हिंदीभाषियों पर हमले हुए हैं

असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने कहा है कि राज्य में हिंदीभाषी लोगों पर हमले की घटनाओं के पीछे चरमपंथियों का हाथ है.

उन्होंने इसके लिए अलगाववादी चरमपंथी संगठन अल्फ़ा को ज़िम्मेदार ठहराया है.

गोगोई ने बताया कि उन्होंने भारत के उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से बात कर उनसे तत्काल अतिरिक्त सुरक्षाबल भेजने का आग्रह किया है.

 मैंने उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से तत्काल अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षाबल भेजने का आग्रह किया है

तरूण गोगोई, मुख्यमंत्री, असम

उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण राज्य से अर्धसैनिक बलों की 20 कंपनियों को चुनाव कार्य के लिए असम से बाहर भेज दिया गया है जिससे राज्य में सुरक्षाबलों की कमी हो गई है.

असम में मंगलवार के बाद से मारे जाने वाले हिंदीभाषियों की संख्या बढ़ कर 25 हो गई है.

राज्य में स्थानीय और दूसरे राज्य के लोगों के बीच हिंसा भड़कने के बाद तनाव बना हुआ है और कुछ इलाक़ों में सेना भी गश्त लगा रही है.

ताज़ा हमले

हिंदीभाषियों के ख़िलाफ़ हिंसा की ताज़ा ख़बर नलबाड़ी शहर से आई है जहाँ तीन लोगों को मारे जाने की ख़बर है.

पुलिस सूत्रों का कहना है कि नलबाड़ी में एक सिनेमाघर के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने कुछ लोगों पर अचानक गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं जिसमें तीन लोग मारे गए.

इनमें दो लोग बिहार से थे जबकि एक व्यक्ति राजस्थान का रहनेवाला था.

बुधवार को ही बोंगाईगाँव ज़िले में अज्ञात हमलावरों ने गोलियाँ चलाकर चार ग़ैर-असमी महिलाओं को मार डाला.

इनमें तीन महिलाएँ बिहार की थीं जबकि एक महिला बंगाल की थी.

गोलाघाट ज़िले में भी एक दूरवर्ती गाँव में एक व्यक्ति को मार डाला गया.

चिंता

असम में हिंदीभाषियों के ख़िलाफ़ हिंसा की इन घटनाओं पर काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी चिंता प्रकट की है.

उन्होंने मुख्यमंत्री तरूण गोगोई से कहा है कि तत्काल लोगों की सुरक्षा के लिए उपाय किए जाएँ.

हिंसा पर बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी चिंता जताई है और उन्होंने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री से दो-दो बार बात की.

हिंदीभाषियों के ख़िलाफ़ हिंसक घटनाओं की शुरुआत इसी महीने तब शुरू हुई जब रेलवे भर्ती बोर्ड ने कर्मचारियों की भर्ती का अभियान शुरु किया.

विभिन्न असमी संगठनों का कहना है कि हिंदीभाषी, ख़ास कर बिहार के प्रत्याशी राज्य में भारी संख्या में स्थानीय नौकरियाँ पा रहे हैं.

असम में हिंदीभाषियों के विरोध से पैदा हुआ तनाव जारी है.

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