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बच्चों की किताब पर मुख्यमंत्री का मुखड़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ में आठवीं कक्षा तक के छात्रों को मुफ्त बाँटी जाने वाली पाठ्य पुस्तकों में राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह की तस्वीर और उनके संदेश छापे जाने को लेकर अच्छा-खासा विवाद खड़ा हो गया है. विवाद इस बात को लेकर भी है कि इन पुस्तकों में मुख्यमंत्री की तस्वीर शुरुआती पन्नों पर छपी है जबकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर को अंतिम पन्ने पर छापा गया है. राजीव गांधी शिक्षा मिशन के सर्वशिक्षा अभियान के तहत मुफ़्त पाठ्य पुस्तक बांटने की इस योजना पर लगभग 50 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं. लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि बांटी गई पुस्तकों को तत्काल वापस लिया जाए और इन किताबों से मुख्यमंत्री की तस्वीर और संदेश हटाए जाएं. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर राज्य भर में विरोध-प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस ने राज्यपाल से भी मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. दूसरी ओर, पाठ्य पुस्तकों में अपनी तस्वीर को लेकर हुए विवाद पर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि "राज्य सरकार अगर पुस्तकें बंटवा रही है तो उसमें मुख्यमंत्री की नहीं तो किसकी तस्वीर छपेगी?" उनका तर्क है कि मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से अपनी तस्वीर और संदेश छपवाए हैं. छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष भीमसेन अग्रवाल महात्मा गांधी की तस्वीर को पाठ्य पुस्तक के अंत में और मुख्यमंत्री की तस्वीर को शुरुआती पन्नों पर छापे जाने को लेकर मुख्यमंत्री रमन सिंह के ही अंदाज में कहते हैं- “संदेश शुरु के पन्ने पर नहीं छपेगा, तो कहां छपेगा? ” 'जोगी बस्ता' राज्य में प्राथमिक शिक्षा को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं.
कांग्रेस के शासन काल में मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने इन्हीं स्कूली बच्चों को बस्ता बांटने की शुरूआत की थी. इन स्कूली बस्तों पर अजीत जोगी की रंगीन तस्वीर छापी गई थी. लेकिन ऐन चुनाव से पहले अजीत जोगी की तस्वीर वाले 'जोगी बस्ता' को लेकर विपक्ष ने इतना हंगामा खड़ा किया कि अंततः चुनाव तक इस बस्ते को बांटने पर प्रतिबंध लगाना पड़ा. चुनाव के बाद अजीत जोगी सरकार से बाहर हो गए और अजीत जोगी की तस्वीर वाले लाखों बस्ते गोदामों में पड़े-पड़े ख़राब होने लगे. अंततः भाजपा सरकार ने अजीत जोगी की तस्वीर के ऊपर स्वामी विवेकानंद की तस्वीर और कुछ स्थानों पर अजीत जोगी की तस्वीर पर काला रंग पोत कर कुछ बस्तों को बंटवाया. ये और बात है कि एक धुलाई में ही इन बस्तों का रंग उतर गया और अजीत जोगी की तस्वीर इन बस्तों पर फिर से उभर गयी. विरोध 'जोगी बस्ता' बांटने वाले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा कि पाठ्य पुस्तकों में मुख्यमंत्री की तस्वीर और संदेश का छापा जाना वास्तव में शिक्षा का राजनीतिकरण है. हालांकि मुख्यमंत्री रहते हुए बस्तों पर अपनी तस्वीर छापे जाने को अजीत जोगी सही बताते हैं. जोगी कहते हैं, "भाजपा ने बस्ते पर मेरी तस्वीर को लेकर हंगामा किया था, जबकि किताबों से तो बच्चों को शिक्षा मिलती है. पाठ्य पुस्तकों पर तो ऐसे व्यक्ति की तस्वीर छपनी चाहिए, जो प्रेरणादायक हो." वहीं विधानसभा में विपक्ष के नेता महेंद्र कर्मा कहते हैं, "किसी पाठ्य पुस्तक में मुख्यमंत्री की तस्वीर और संदेश मैंने आज तक नहीं देखे हैं. यह तो सीधे-सीधे अबोध बच्चों को राजनीतिक पाठ पढ़ाने की तरह है. ऊपर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर को अंतिम पन्नों पर छाप कर भाजपा सरकार ने राष्ट्र का अपमान किया है." कर्मा की मांग है कि भाजपा सरकार लगभग 35 लाख बच्चों को बांटे जाने वाले इन पाठ्य पुस्तकों को वापस ले और उन्हें दुबारा छपवाए. कर्मा ने कहा कि हम तब तक विरोध करते रहेंगे, जब तक इन किताबों से मुख्यमंत्री रमन सिंह की तस्वीर नहीं हटाई जाती. |
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