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भारत-अमरीका के बीच रक्षा समझौता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और अमरीका ने अगले 10 वर्षों के दौरान रक्षा सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. बुधवार को हुए इस समझौते में तकनीक हस्तांतरण, सहयोग, सहनिर्माण, अनुसंधान और विकास जैसे मुद्दे शामिल किए गए हैं. इस प्रारूप पर भारतीय रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी और अमरीकी रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने वाशिंगटन में हस्ताक्षर किए. एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि अमरीका और भारत दोनों के रक्षा संबंध द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार हैं. इसके उद्देश्यों में दोनों देशों की सुरक्षा, सामरिक साझेदारी को मज़बूत करने और दोनों देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों में बेहतर समझ विकसित करना बताया गया है. प्रारूप में कहा गया है, 'भारत और अमरीका सहयोग के एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जिसमें दोनों दोनों के साझा सिद्धांत और राष्ट्रीय हित नज़र आएँ और ये दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध व्यापक सहयोग का एक हिस्सा होंगे.' बयान में स्वीकार किया गया है कि दोनों देशों में रक्षा सहयोग इतने प्रगाढ़ कभी नहीं हुए हैं जितने इस समय हैं. सहयोग के नए समझौते अनुसार 'दोनों देश संयुक्त अभ्यास करेंगे, साझा हितों के मामले में संयुक्त अभियान चलाएँगे और सुरक्षा और आतंकवाद के ख़िलाफ़ सैन्य क्षमता बढाएँगे.' अहम सहयोग प्रेक्षक दोनों देशों के रिश्तों में पिछले कुछ समय में सुधार को देखते हुए इस सहयोग को ख़ासा अहम मान रहे हैं. यह समझौता भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जुलाई में होनेवाली अमरीका यात्रा से पहले हुआ है. वाशिंगटन में मंगलवार को अपने भाषण में रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अमरीका से परमाणु तकनीक हस्तांतरण से प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया था. अमरीका ने भारत के 1998 में परमाणु विस्फोट करने के बाद प्रतिबंध लगा दिए थे. कुछ दिनों पहले अमरीका ने पाकिस्तान को एफ़-16 लड़ाकू विमान देने का फ़ैसला किया था जिसको लेकर भारत ने नाराज़गी जताई थी. लेकिन उस दौरान ही अमरीका ने भारत के साथ अपना सामरिक सहयोग और आगे बढ़ाने की भी मंशा ज़ाहिर कर दी थी. |
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