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आपसी समझ के बाद अमरीका से बात | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के विदेशमंत्री महमूद कसूरी ने कहा है कि ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन परियोजना पर भारत और पाकिस्तान के बीच सभी तकनीकी मसले सुलझ जाने के बाद अमरीका से इस विषय में बात की जाएगी. पिछले कुछ दिनों से इस तरह की ख़बरें आती रही हैं कि अमरीका ईरान के साथ मिल कर गैस पाइप लाइन बनाने के पाकिस्तान के फ़ैसले से चिंतित है, बीबीसी हिंदी के साथ एक बातचीत के दौरान पाकिस्तान के विदेशमंत्री महमूद कसूरी ने स्वीकार किया कि अमरीकी विदेशमंत्री कोंडोलीसा राइस ने पिछली मुलाक़ात के दौरान उनसे ईरान पाकिस्तान भारत गैस परियोजना पर बात की थी. महमूद कसूरी ने आगे कहा कि कॉंडलिसा राइस ने यह मुद्दा भारत के साथ भी उठाया था. मगर यह सवाल पूछे जाने पर कि क्या अमरीका पाकिस्तान पर इस परियोजना में शामिल ना होने के लिए दबाव डाल रहा है, उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया. परियोजना का महत्व महमूद कसूरी ने कहा कि पाकिस्तान और भारत की अर्थ व्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है और इसकी उर्जा की ज़रूरतें पूरी करने के लिए दोनों देशों को इंतज़ाम करने होंगे. उन्होंने कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के विशेषज्ञ इस गैस पाइपलाइन परियोजना के सारे तकनीक मसलों पर फ़ैसला कर लेंगे, उसके बाद अमरीका से बात की जाएगी. महमूद कसूरी ने कहा, "इस मामले में भारत और पाकिस्तान मिल कर या अकेले अकेले भी अमरीका से बात कर सकते हैं क्यों कि यह परियोजना दोनों ही देशों के लिए बहुत अहम है. इसलिए फ़िलहाल यह बात नहीं करनी चाहिए की अमरीका इस बारे में क्या कह रहा है." सीपीएम की प्रतिक्रिया इससे पहले भारत की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा कि अमरीकी दबाव में भारत और पाकिस्तान को ईरान- पाकिस्तान -भारत गैस पाइपलाइन परियोजना को नहीं छोड़नी चाहिए. सीपीएम ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अपनी अमरीका यात्रा के दौरान भारत के रुख़ को स्पष्ट करने को भी कहा. पार्टी पोलित ब्यूरो ने इस संबंध में एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया है कि ''अमरीका इस परियोजना को समाप्त करने के लिए दबाव'' डाल रहा है. सीपीएम का कहना है कि अमरीका के इस दबाव को भारत और पाकिस्तान दोनों को ठुकरा देना चाहिए. पार्टी का कहना है कि ''ईरान-पाकिस्तान-भारत के संयुक्त कार्यदल गठित करने और ईरान से भारत को गैस की आपूर्ति के कारण यह क़दम उठाया गया है.'' सीपीएम का कहना था कि ''अपनी अमरीका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारत का रुख़ स्पष्ट करना चाहिए और अमरीका के दबाव में यह परियोजना नहीं छोड़नी चाहिए.'' |
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