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पाइपलाइन पर भारत-पाक वार्ता शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान से पाकिस्तान होकर भारत आने वाली गैस पाइपलाइन पर भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू हो गई है. अरबों डॉलर की इस परियोजना की सुरक्षा पर पाकिस्तानी अधिकारियों से बात करने भारत के पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर इस समय पाकिस्तान के दौरे पर हैं. मणिशंकर अय्यर ने रविवार को पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अमानुल्ला ख़ान जदून से मुलाक़ात की. पहले दौर की बातचीत के बाद मणिशंकर अय्यर ने कहा कि पूरी बातचीत के बाद एक संयुक्त बयान जारी करेंगे. दोनों देशों के बीच तनाव के कारण एक बार यह बातचीत स्थगित कर दी गई थी. 2600 किलोमीटर की इस पाइपलाइन पर क़रीब चार अरब डॉलर का ख़र्च आएगा. भारत के लिए यह परियोजना काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस परियोजना के पूरा होने पर वह अपनी ऊर्जा की कमी को पूरा कर पाएगा. सहमति बातचीत से पहले मणिशंकर अय्यर ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "अगर सुरक्षा और अन्य मसलों पर पाकिस्तान के साथ सहमति हो जाती है तो इस परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा और मुझे उम्मीद है कि तीन साल में यह पूरा हो जाएगा."
मणिशंकर अय्यर ने बताया कि इस परियोजना पर दो तरह का समझौता है. ईरान और भारत को क़ीमत पर सहमत होना है जबकि ईरान और पाकिस्तान को पाइपलाइन के निर्माण पर समझौता करना है. उन्होंने कहा कि इस तरह समझौते के बारे में एक त्रिपक्षीय वार्ता की ज़रूरत भी पड़ सकती है. दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने कहा कि गैस पाइपलाइन परियोजना से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा. ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की मांग 2020 तक दोगुनी हो जाने की संभावना है. भारत इस समय अपने इस्तेमाल के प्राकृतिक गैस का सिर्फ़ 50 प्रतिशत उत्पादन करता है जबकि ज़रूरी कच्चे तेल का 70 फ़ीसदी आयात करता है. |
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