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नौ पुल बहे, हज़ारों विस्थापित | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी में अभी भी बाढ़ की स्थिति बनी हुई है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर अब कुछ कम हो रहा है. सतलुज नदी में रविवार को अचानक जल स्तर बढ़ जाने के कारण दो सौ किलोमीटर तक नदी के किनारे रहने वाले हज़ारों लोगों को विस्थापित करना पड़ा है. हिमाचल प्रदेश सरकार के अलावा केंद्र सरकार भी स्थिति पर नज़र रखे हुए है. नदी में जलस्तर बढ़ने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है. हालांकि अधिकारी मान रहे हैं कि तिब्बत के पारचु झील में जल स्तर बढ़ जाने के कारण ही सतलुज का जलस्तर बढ़ा है. हालांकि हिमाचल प्रदेश की ऊर्जा मंत्री विद्या स्ट्रोक्स ने रविवार को बीबीसी से कहा था कि बर्फ पिघलने के कारण सतलुज की सहायक नदियों में एकाएक पानी बढ़ गया है इसकी वजह से भी पानी बढ़ा है. उपग्रह चित्र केंद्र सरकार सेटेलाइट की एक तस्वीर जारी करने वाली है और इसके बाद ही वस्तुस्थिति का पता चल सकेगा. स्थानीय पत्रकार बलदेव चौहान का कहना है कि इस बीच सतलुज पर बने कम से कम नौ पुल बह गए हैं. इस बीच देश के सबसे बड़े पनबिजली संयंत्र नाथपा-झारड़ी संयंत्र को बंद कर दिया गया है. ऊर्जा मंत्री के अनुसार पानी के साथ आने वाली मिट्टी यानी सिल्ट के कारण इसे बंद करना पड़ा है. राज्य के अधिकारियों का कहना है कि सेना और अर्धसैनिक बलों को सतर्क कर दिया गया है और वे किसी भी आपात स्थिति में सहायता के लिए पहुँचने को तैयार हैं. |
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