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सीमाएँ नहीं बदलेंगी: मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि शांति के लिए सीमाओं का फिर से निर्धारण नहीं होगा क्योंकि यह देश की प्रतिष्ठा और सुरक्षा से जुड़ा है. सियाचिन के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया के सबसे ऊँचे युद्ध क्षेत्र को 'शांति पर्वत' बना दिया जाए. मनमोहन सिंह सियाचिन ग्लेशियर का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं. वर्ष 2003 के आख़िर में भारत और पाकिस्तान ने सियाचिन में युद्ध विराम पर सहमति व्यक्त की थी जो अभी भी लागू है. सियाचिन में मौजूद सैनिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सियाचिन दुनिया का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है जहाँ रहना बहुत बड़ी कठिनाई हैं. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इसे 'शांति पर्वत' के रूप में बदल दिया जाए. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बारे में पाकिस्तान से बात चल रही है. फेरबदल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि शांति के लिए वे सीमाओं में कोई फेरबदल स्वीकार नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, "हम ये महसूस करते हैं कि सीमाएँ न सिर्फ़ सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं बल्कि ये देश की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई हैं." प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतिष्ठा के लिए भारतीय सैनिक इस ऊँचाई पर कठिनाई को भी ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार करते हैं. उन्होंने कहा, "हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम शांति का ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें किसी को किसी से डर न हो और संघर्ष की भी कोई गुंजाइश न हो. और यह स्थान शांति का उदाहरण बन जाए." देश की एकता और अखंडता के लिए सैनिकों के योगदान की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सभी ज़रूरतों को पूरा किया जाएगा. |
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