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दोनों शंकराचार्य कांची मठ लौटे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती और उनके सहायक विजयेंद्र सरस्वती अपनी गिरफ़्तारी के सात महीने बाद बुधवार को कांची मठ लौट आए. इससे पहले कुछ समय से वे वेल्लूर ज़िले के कलवई मंदिर के परिसर में रह रहे थे. वहाँ पूजा करने के बाद दोनों शंकराचार्य काँची मठ लौटे. वैसे मार्च में एक बार जयेंद्र सरस्वती मठ जाकर पूजा कर चुके है लेकिन इस पूजा के बाद वे लौट आए थे. मठ के एक पूर्व कर्मचारी शंकररमण की हत्या के मामले में अभियुक्त बनाए जाने के बाद दोनों शंकराचार्यों को गिरफ़्तार किया गया था और अदालत ने एक समय तक उनके कांची मठ लौटने पर रोक लगा दी थी. उनके लौटने पर कांची के भक्तों ने परंपरागत ढंग से उनका स्वागत किया. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उनकी वापसी पर ख़ास उत्साह नहीं दिख रहा था. हालांकि मठ के अधिकारियों का कहना है कि ख़ुद शंकराचार्य नहीं चाहते थे कि उनकी वापसी पर कोई बड़ा आयोजन किया जाए. उनके स्वागत के लिए विशेष शामियाना लगाया गया था और परंपरागत छतरियों सहित दो हाथी मौजूद थे. इसके बाद शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने आदि शंकराचार्य की मूर्ति की आरती उतारी और फिर पूजा की तैयारी के लिए चले गए. उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करने से इनकार कर दिया. मामला नवंबर महीने में शंकररामण की हत्या का मामला प्रकाश में आया और उसके बाद शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया.
हिंदू धर्म के बड़े आध्यात्मिक गुरुओं में से एक माने जाने वाले शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई थी. लेकिन बाद में पुलिस को दिए उनके बयान और मामले की कई और परतें खुलने के बाद राजनीतिक विरोध शांत हो गया था. उन्हें बड़ी मशक्कत के बाद सुप्रीम कोर्ट से 10 जनवरी को ज़मानत मिली लेकिन उसी दिन उनके सहायक जूनियर शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती को गिरफ़्तार कर लिया गया था. बाद में विजयेंद्र सरस्वती को भी ज़मानत मिल गई थी लेकिन अदालत ने शर्त रखी थी कि जब तक इस मामले की जाँच पूरी कर लेने के बाद पुलिस आरोप पत्र दाखिल नहीं कर देती दोनों शंकराचार्य काँची मठ में न जाएँ. आरोप पत्र 21 जनवरी को दाखिल कर दिया गया था. |
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