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शंकराचार्य तीन दिन की पुलिस हिरासत में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांचीपुरम की एक अदालत ने शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. हालांकि बचाव पक्ष के अनुरोध पर अदालत ने यह मान लिया है कि पूछताछ के दौरान शंकराचार्य के वकील को उपस्थित रहने की अनुमति दी जाए. शंकराचार्य को कांचीपीठ के एक कर्मचारी की हत्या में शामिल होने का आरोप में 11 नवंबर की आधी रात को तमिलनाडु की पुलिस ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के महबूबनगर ज़िले में गिरफ़्तार किया था. उसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में थे और उन्हें वेल्लूर जेल में रखा गया था. तमिलनाडु पुलिस ने कांची की अदालत में याचिका दायर करके कहा था कि शंकराचार्य को पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में दे दिया जाए. गुरुवार को शंकराचार्य की उपस्थिति में इस मामले की सुनवाई हुई थी लेकिन अदालत ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा था. छूट शंकराचार्य के वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया था कि पुलिस हिरासत में दौरान पूछताछ के दौरान उनके वकीलों को उपस्थित रहने की अनुमति दी जाए. मजिस्ट्रेट उदय राज ने इस अनुरोध को मान लिया है. अदालत ने बचाव पक्ष के इस अनुरोध को भी मान लिया है कि चूंकि शंकराचार्य ध्यान आदि करते रहते हैं इसलिए जब वे ध्यान कर रहे हों या पूजा कर रहे हों तो उनसे ज़बरदस्ती पूछताछ न की जाए. बचाव पक्ष के ही अनुरोध पर अदालत ने अनुमति दी है कि रोज़ शाम को शंकराचार्य के डॉक्टर आकर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण कर सकेंगे. दूसरी ओर चेन्नई हाईकोर्ट में शंकराचार्य की ज़मानत याचिका पर सुनवाई चल रही है. हाईकोर्ट ने ज़मानत याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा हुआ है. इस बीच राज्य की मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा है कि कांची कामकोटी पीठ के कर्मचारी की हत्या के मामले में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के ख़िलाफ़ पुलिस के पास 'पुख़्ता सुबूत' हैं. |
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