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एक भी वोट नहीं मिला उम्मीदवार को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्या ऐसा हो सकता है कि किसी चुनाव में किसी उम्मीदवार को एक भी वोट नहीं मिले? वह भी तब जबकि वह राज्य के प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरा हो! पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना जिले के बादुड़िया नगरपालिका चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर अपनी किस्मत आजमाने उतरे सफीकुल विश्वास ने यह अनूठा रिकार्ड बनाया है. सफीकुल को अपने चुनाव एजेंट तक का वोट नहीं मिला. इस घटना से पार्टी ही नहीं, बल्कि विपक्ष के नेता भी हैरान हैं. तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता तरुण नागचौधुरी कहते हैं कि "एक भी वोट नहीं मिलने की बात समझ में नहीं आती. बीते विधानसभा चुनाव में इस वार्ड में पार्टी के उम्मीदवार को लगभग चार सौ वोट मिले थे." पेशे से व्यापारी सफीकुल का नाम दूसरे वार्ड की मतदाता सूची में होने के कारण उनको अपना वोट भी नहीं मिला. वे इस स्थिति के लिए पार्टी के नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हैं. सफीकुल कहते हैं कि "माकपा को हराने के लिए पार्टी के चुनावी एजेंटों और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को वोट दिए हैं.पहले यह बात पता होती तो मैं चुनाव ही नहीं लड़ता." बादुड़िया ब्लॉक तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष शंकर चक्रवर्ती कहते हैं कि "स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के साथ मिल कर प्रचार करने के कारण ही शायद किसी ने तृणमूल को वोट नहीं दिया." इलाके के एक वोटर मोहम्मद हफीज कहते हैं कि "लोग किसी भी पार्टी और उम्मीदवार पर भरोसा करके ही उसे वोट देते हैं. लेकिन यहां तृणमूल ने जब चुनाव के पहले ही कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन करने की अपील की तो लोग उस पर भरोसा कैसे करेंगे इसलिए सबने कांग्रेस को ही वोट दिया." बहरहाल, चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार को उसके वार्ड के बाहर शायद ही कोई जानता हो लेकिन सफीकुल ने अपना नाम शानदार रिकॉर्ड के साथ रोशन कर दिया है. |
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